भक्ति की कोई उम्र नहीं: कहलगांव में कथा के दौरान बोलीं किंकर किशोरी

MyBhagalpur Team13 October 20261 min read0 viewsCity Local
भक्ति की कोई उम्र नहीं: कहलगांव में कथा के दौरान बोलीं किंकर किशोरी

कहलगांव के नाथलोक कॉलोनी स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक किंकर किशोरी ने जोर देकर कहा कि भक्ति उम्र से बंधी नहीं है और भगवान को सच्चे मन से याद करने से आध्यात्मिक मुक्ति मिलती है। उन्होंने आग्रह किया कि बचपन में ही भक्ति के बीज बोए जाने चाहिए। ध्रुव चरित्र और अजामिल की कथाओं का जिक्र करते हुए कथाकार ने बताया कि भक्त ध्रुव ने मात्र छह वर्ष की आयु में दिव्य साक्षात्कार प्राप्त किया, जिससे यह साबित होता है कि आयु आस्था में कोई बाधा नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अपना जीवन भगवान को समर्पित करना चाहता है, तो उसे बुढ़ापे के सूखे फूल की तरह नहीं बल्कि बचपन में खिले हुए ताजे फूल की तरह अर्पित करना चाहिए। उन्होंने अंत में बच्चों में कम उम्र से ही भक्ति, संस्कार और भगवान के प्रति श्रद्धा विकसित करने की वकालत की।

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