कोसी नदी की बाढ़ से भागलपुर में दस हजार लोग फंसे, नाव न मिलने से महिला की मौत

MyBhagalpur Team9 September 20262 min read26 viewsSad/Bad
कोसी नदी की बाढ़ से भागलपुर में दस हजार लोग फंसे, नाव न मिलने से महिला की मौत

भागलपुर के नौगछिया अनुमंडल में कोसी नदी की बाढ़ से दस हजार लोग घिर गए हैं। सिंहकुंड गांव के छह टोले टापू बन गए हैं। ग्रामीण कई दिनों से फंसे हैं और बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है।

  • दस हजार लोग बाढ़ में फंसे
  • नाव न मिलने से हुई मौत
  • चार साल से नहीं मिला मुआवजा

मुश्किल में जरूरी सेवाएं

भागलपुर के नौगछिया में कोसी नदी की बाढ़ से लगभग 10,000 निवासी अलग-थलग पड़ गए हैं। सिंहकुंड गांव के छह टोले एक द्वीप में बदल गए हैं। कई दिनों से ग्रामीण फंसे हुए हैं, बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है और जरूरी सेवाओं तक पहुंच खत्म हो गई है। दैनिक जरूरतों के लिए कोई स्थानीय दुकानें नहीं हैं, और निवासियों को बुनियादी सामान मिलने में भारी परेशानी हो रही है।
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अस्पताल जाने में आ रही बाधा

चिकित्सा सुविधा पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। सबसे पास का अस्पताल 10 किलोमीटर दूर है, मरीजों को पहले नाव से बाढ़ का पानी पार करना होता है और फिर सड़क से जाना पड़ता है। गांव में कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या रहने वाले डॉक्टर नहीं हैं।

समय पर नाव न मिलने से गई जान

इस अलगाव की गंभीरता तब सामने आई जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बबीता कुमारी की उनके आंगन में जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई। उनकी बेटी राजश्री भारती और जिला परिषद सदस्य गौरव राय ने बताया कि परिवार ने उन्हें नौगछिया अस्पताल ले जाने के लिए नाव खोजने में एक घंटा बिताया, लेकिन नाव के आने में हुई देरी जानलेवा साबित हुई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर एक पक्की नाव मिल जाती तो उनकी जान बच सकती थी।

प्रशासनिक मदद का अभाव

स्थानीय निवासियों, जिसमें गांव की महिलाएं भी शामिल हैं, का दावा है कि कोसी नदी के हर साल बाढ़ लाने के बावजूद, उन्हें पिछले चार साल से प्रशासन द्वारा बाढ़ पीड़ित घोषित नहीं किया गया है, जिससे उन्हें जरूरी सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत सुनिश्चित करने के मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेश के बावजूद, ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति का जायजा लेने कोई भी सरकारी अधिकारी मौके पर नहीं आया है। परिवार और बच्चे अब राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इस समय भोजन, दवा और आने-जाने के साधन की कमी एक गंभीर चिंता बनी हुई है। समुदाय औपचारिक रूप से पक्की नावों, चिकित्सा सुविधाओं और जरूरी राहत सामग्री तुरंत उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है।

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