लखीसराय: पुराने लीगल फॉर्म रद्द करने के फैसले पर भड़के क्लर्क, जोरदार विरोध शुरू

लखीसराय में जिला बार एसोसिएशन के एक फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। एसोसिएशन ने 1 अगस्त 2026 से पहले खरीदे गए सभी लीगल फॉर्म को अमान्य (रद्द) करने और नए फॉर्म बेचने का निर्णय लिया है, जिससे वकीलों और उनके क्लर्कों में काफी नाराजगी है।
मुख्य बातें:
- 1 अगस्त 2026 से पहले के लीगल फॉर्म रद्द करने के फैसले का विरोध।
- दर्जन से ज्यादा क्लर्कों ने जिला बार एसोसिएशन को ज्ञापन सौंपा।
- पुराने फॉर्म रद्द होने से वित्तीय नुकसान और काम में दिक्कत का दावा।
- फर्जी फॉर्म की पहचान के लिए बिक्री रिकॉर्ड की जांच का सुझाव।
एसोसिएशन को सौंपा ज्ञापन
दर्जन से अधिक अधिवक्ता क्लर्कों ने जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने इस फैसले पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की है। क्लर्कों का कहना है कि उन्होंने एसोसिएशन के काउंटर पर जरूरी फीस जमा करके ये फॉर्म कानूनी तौर पर खरीदे थे। उनका तर्क है कि बिना किसी स्पष्ट प्रक्रिया के इन फॉर्मों को रद्द करने से उन्हें आर्थिक नुकसान होगा और कोर्ट के कामों में व्यावहारिक मुश्किलें आएंगी।
फर्जी फॉर्म की पहचान का सुझाव
क्लर्कों ने सुझाव दिया कि अगर पुराने फॉर्मों के गलत इस्तेमाल का डर है, तो एसोसिएशन ऑफिस में मौजूद बिक्री रिकॉर्ड से उनका सत्यापन कर सकती है। चूंकि काउंटर से जारी फॉर्मों का रिकॉर्ड मौजूद है, इसलिए असली और फर्जी दस्तावेजों के बीच अंतर करना संभव है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि कोई व्यक्ति फर्जी फॉर्म का उपयोग करते पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जा सकती है।
प्रक्रिया और मंजूरी पर सवाल
ज्ञापन में यह बात भी उठाई गई कि पुराने फॉर्मों के बदले नए फॉर्म लेने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई गई है, जिससे मौजूदा फॉर्मों की स्थिति उलझ गई है। इसके अलावा, क्लर्कों ने आरोप लगाया कि नए फॉर्म बेचने का निर्णय जनरल असेंबली की मंजूरी के बिना लिया गया और इस बारे में एसोसिएशन के अध्यक्ष से उचित परामर्श नहीं किया गया था।
समूह ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों से अपील की है कि वे वकीलों और क्लर्कों के हितों को प्राथमिकता देते हुए 1 अगस्त 2026 से पहले खरीदे गए फॉर्मों को रद्द करने के फैसले को वापस लें।