लखीसराय के स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले सुरक्षा गार्डों ने अपनी समस्या को लेकर जिला मजिस्ट्रेट से गुहार लगाई है। गार्डों ने बकाया वेतन और प्रोविडेंट फंड (पीएफ) का पैसा नहीं मिलने पर हस्तक्षेप करने की अपील की है। - 1 जून 2022 से जिला अस्पतालों, ब्लॉक अस्पतालों और पंचायत स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों पर दे रहे हैं सुरक्षा सेवाएं। - विजय बहादुर थापा एजेंसी के माध्यम से रखे गए थे ये सुरक्षा गार्ड। - नवंबर 2025 से वेतन और पीएफ का कोई भुगतान नहीं किया गया है। - नई एजेंसी 6 किंग ग्रुप ने 2026 में संभाला है सुरक्षा का ठेका।
स्वास्थ्य विभाग में तैनात सुरक्षा गार्डों को 7,000 रुपये प्रति महीने की सैलरी पर रखा गया है। कम वेतन होने के बावजूद गार्डों ने बेरोजगारी और आर्थिक मजबूरियों के कारण अपनी ड्यूटी जारी रखी। श्रमिकों ने बताया कि पिछली एजेंसी नियमित भुगतान करने में असफल रही और अक्सर दो से तीन महीने तक वेतन में देरी करती थी। नवंबर 2025 से वेतन और पीएफ का भुगतान न होने के कारण इन कर्मचारियों को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है और वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी करने में संघर्ष कर रहे हैं।
नई व्यवस्था में बदलाव को लेकर गार्डों ने बताया कि 6 किंग ग्रुप ने 2026 में सुरक्षा का ठेका अपने हाथ में लिया है। उनका आरोप है कि वे नई एजेंसी के तहत काम तो कर रहे हैं, लेकिन उनके बकाया वेतन और पीएफ योगदान के भुगतान के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। गार्डों ने इस बात पर जोर दिया कि मनरेगा के काम के लिए वर्तमान दैनिक मजदूरी 477 रुपये है, जो अस्पतालों में उनकी जिम्मेदार ड्यूटी को देखते हुए बहुत कम है। जिला मजिस्ट्रेट से राहत की गुहार लगाने वाले प्रतिनिधिमंडल में सुरक्षा गार्ड रवि शंकर, विद्यासागर कुमार, रंजन कुमार, दिलीप यादव, मुकेश कुमार, गुलशन कुमार, प्रमोद कुमार और प्रजेंद्र कुमार आदि शामिल थे। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच और सभी बकाया राशि को जल्द से जल्द जारी करने की औपचारिक मांग की है।