भागलपुर के मदरौनी गांव में बाढ़ का कहर लगातार जारी है और यहां के विस्थापितों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। बाढ़ के पानी से घिरने के बाद अपने घरों को छोड़ रेलवे ट्रैक के किनारे शरण लिए सैकड़ों परिवारों पर प्रशासन की नजर अब तक नहीं पड़ी है। सरकारी मदद न मिलने से नाराज विस्थापितों ने चेतावनी दी है कि अगर कल तक राहत के तौर पर प्लास्टिक नहीं मिली तो प्रखंड मुख्यालय का घेराव और सड़क जाम किया जाएगा।
- भागलपुर के मदरौनी में बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा
- रेलवे ट्रैक के किनारे शरण लेने को मजबूर सैकड़ों परिवार
- प्रशासन पर अनदेखी का गंभीर आरोप
- कल तक प्लास्टिक नहीं मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
भागलपुर से 21 सितंबर। जिले के मदरौनी में बाढ़ का कहर लगातार जारी है, लेकिन यहां के विस्थापितों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। बाढ़ के पानी से घिरने के बाद अपने घरों को छोड़ रेलवे ट्रैक के किनारे शरण लिए सैकड़ों परिवारों पर प्रशासन की नजर अब तक नहीं पड़ी है।
सरकारी मदद न मिलने से नाराज विस्थापितों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा है। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि अगर कल तक उन्हें राहत के तौर पर प्लास्टिक मुहैया नहीं कराई गई, तो वे प्रखंड मुख्यालय का घेराव करेंगे और राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब तक बुनियादी राहत सामग्री भी नसीब नहीं हुई है। इस भीषण धूप और अचानक होने वाली बारिश में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग काफी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
सोमवार को जब क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी सुजीत सिंह इन विस्थापितों का हाल जानने पहुंचे, तो पीड़ित ग्रामीण अपनी तकलीफें बताते हुए भावुक हो गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाढ़ आने के कई दिन बीत जाने के बाद भी अंचल या प्रखंड प्रशासन का कोई अधिकारी उनकी स्थिति देखने तक नहीं आया है। ग्रामीण महिला बिछिया देवी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि हमारा सब कुछ डूब चुका है। हम लोग रेलवे ट्रैक पर रहने को मजबूर हैं।
धूप और बारिश से बचने के लिए हमारे पास एक पन्नी तक नहीं है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन सरकार या प्रशासन की तरफ से कोई देखने नहीं आया।
समाजसेवी सुजीत सिंह ने प्रशासन के इस रवैए पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मदरौनी के बाढ़ पीड़ितों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। प्रशासन पूरी तरह से संवेदनहीन बना हुआ है।
हम प्रशासन को अल्टीमेटम दे रहे हैं कि अगर कल तक इन विस्थापित परिवारों को प्लास्टिक और अन्य आवश्यक राहत सामग्री नहीं दी गई, तो ग्रामीणों के साथ मिलकर ब्लॉक कार्यालय का घेराव किया जाएगा और उग्र आंदोलन करते हुए सड़क जाम की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।