भागलपुर के नाथनगर के चंपानगर स्थित ऐतिहासिक महाशय ड्योढ़ी दुर्गा मंदिर में रविवार को 18 दिवसीय शारदीय नवरात्र का विधिवत और भव्य शुभारंभ हो गया। बांग्ला परंपरा के अनुसार आयोजित होने वाले इस महापर्व के पहले दिन वैदिक मंत्रोच्चार, शंख ध्वनि और पारंपरिक ढाक की गूंज के बीच मंदिर परिसर में बोधन कलश स्थापित किया गया। इसके ठीक बाद मंदिर में 400 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक कौड़ी लूट की रस्म निभाई गई, जिसमें कौड़ी पाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
- भागलपुर के नाथनगर में महाशय ड्योढ़ी दुर्गा मंदिर में 18 दिवसीय नवरात्र शुरू हुआ
- मंदिर में बोधन कलश स्थापना और 400 साल पुरानी कौड़ी लूट की रस्म हुई
- बंगाली परंपरा के तहत कौड़ी को सुख-समृद्धि और धन कुबेर का प्रतीक माना जाता है
घट स्थापना से पूर्व सुबह करीब 7 बजे मंदिर परिसर से एक भव्य बोधन घट शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-ढाक, बाजा-गाजा और घंटी-घड़ियाल के बीच श्रद्धालु बोधन घट को लेकर बंगाली टोला होते हुए गंगा घाट पहुंचे। वहां आचार्यों द्वारा पवित्र मंत्रोच्चार के बीच कलश में जल भरा गया, जिसे वापस मंदिर लाया गया। इसके बाद विधि-विधान से कलश का द्वार पूजन और महाआरती कर इसे स्थापित किया गया।
बोधन कलश स्थापित होते ही मंदिर के पुरोहितों द्वारा धन के देवता कुबेर की पूजा की हुई कौड़ियों को हवा में उछाला गया, जिसे लपकने के लिए भक्तों के बीच होड़ मच गई। श्रद्धालुओं, विशेषकर सुहागिन महिलाओं की भीड़ इतनी अधिक थी कि हर कोई माता का आशीर्वाद रूपी कौड़ी अपने आंचल में समेटने को बेताब दिखा। मान्यता है कि बंगाली परंपरा में कौड़ी को सुख-समृद्धि और धन कुबेर का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं इस कौड़ी को सिंदूर के डिब्बे में रखती हैं, जिससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। महाशय ड्योढ़ी के मुख्य आयोजकों के अनुसार, जहां पूरे देश में मुख्य रूप से 10 दिनों की दुर्गा पूजा होती है, वहीं महाशय ड्योढ़ी में यह महापर्व 18 दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल से हुई थी। यहां की बांग्ला पद्धति की पूजा और विसर्जन की अनूठी परंपरा को देखने के लिए हर साल देश-विदेश से श्रद्धालु भागलपुर पहुंचते हैं। रविवार को हुए इस भव्य आयोजन के बाद अब अगले 18 दिनों तक यहां भक्ति की बयार बहेगी।