भगतलपुर: बरारी थाने की हिरासत में मौत, परिजनों ने लगाया पुलिस पर गंभीर आरोप, जांच की मांग

भगतलपुर के बरारी पुलिस स्टेशन की हिरासत में पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार निवासी 50 वर्षीय महेंद्र मंडल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना के बाद मृतक के परिजन उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
- विक्रमशिला सेतु से बरामद होने के बाद महेंद्र मंडल को बरारी पुलिस को सौंपा गया था।
- बेटी का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें जंगल ले जाकर जान से मारने की धमकी दी थी।
- सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए उन्हें लॉकअप की जगह CCTNS रूम में रखा गया था।
- परिजनों का दावा है कि पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की और मैजिस्ट्रियल जांच नहीं कराई।
बेटी और भतीजे के गंभीर आरोप
महेंद्र मंडल की बेटी और भतीजे ने उनकी मौत को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। बेटी का दावा है कि मौत से पहले उसके पिता ने उसे फोन किया था और बताया था कि पुलिस उन्हें जंगल ले गई है और आधे घंटे के भीतर उन्हें जान से मारने की धमकी दी है।
नियमों की अनदेखी और संदिग्ध मौत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानक प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित लॉकअप में रखने के बजाय, मंडल को पुलिस स्टेशन के CCTNS रूम में रखा गया था, जहां कथित तौर पर उन्होंने बिजली के तार से आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और जिलाधिकारी को अनिवार्य रिपोर्ट नहीं दी और मैजिस्ट्रियल जांच शुरू नहीं की। इसके बजाय, जल्दबाजी में पंचनामा और पोस्टमार्टम कराकर इसे अप्राकृतिक मृत्यु (UD) का मामला दर्ज कर लिया गया।
पुलिस रिकॉर्ड में गड़बड़ी और कानूनी पहलू
पुलिस रिकॉर्ड में भी विसंगतियां सामने आई हैं। घटना की रात ऑफिसर रंजित ड्यूटी पर थे, लेकिन UD केस में रीतालाल को शिकायतकर्ता बनाया गया है। हालांकि पुलिस ने शुरू में थाने में आत्महत्या से इनकार किया था, लेकिन CCTV फुटेज के विश्लेषण से सुरक्षा में चूक सामने आई है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस हिरासत में मौत एक गंभीर अपराध है, जिसमें IPC की धारा 302, 304, 304A और 306 के तहत आरोप लग सकते हैं और पुलिस एक्ट के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।