भागलपुर के मंगलपुर गांव में आस्था का केंद्र है 250 साल पुराना प्राचीन काली मंदिर
भागलपुर के मंगलपुर गांव में स्थित 250 साल पुराने काली मंदिर की अद्भुत कहानी और आस्था का केंद्र।

बिहार के भागलपुर जिले के अमौर ब्लॉक स्थित विष्णुपुर पंचायत का मंगलपुर गांव आज अपनी एक खास पहचान के लिए जाना जाता है। यहां स्थित मंगलपुर काली मंदिर भागलपुर का एक ऐसा प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहां पिछले करीब 250 वर्षों से लोगों की अटूट आस्था जुड़ी हुई है। यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के श्रद्धालुओं के लिए भी शक्ति और विश्वास का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।
इस मंदिर के साथ एक बेहद दिलचस्प और रहस्यमयी कहानी जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों की मानें तो सदियों पहले सौर-सगुनिया क्षेत्र के एक तांत्रिक अपनी आध्यात्मिक शक्तियों के माध्यम से मां काली की अलौकिक ऊर्जा को जाग्रत कर मंगलपुर की ओर बढ़े थे। कहा जाता है कि रात के अंधेरे में अपनी साधना के बल पर वे आगे बढ़ रहे थे और गांव के पास 'कजर-मजर' नामक स्थान पर थोड़ी देर रुके थे। लेकिन जैसे ही वे गांव के बीचों-बीच पहुंचे, एक ऐसी दैवीय शक्ति का प्रभाव हुआ कि वे मां काली की शक्ति को उससे आगे नहीं ले जा सके। माना जाता है कि मां काली ने उसी पवित्र स्थान को अपना निवास चुना और वहीं उनकी उपस्थिति स्थापित हो गई।
श्रद्धा और परंपरा का संगम
उस घटना के बाद से ही ग्रामीणों ने वहां पूजा-अर्चना शुरू की और धीरे-धीरे यह स्थान एक भव्य धार्मिक परंपरा में बदल गया। पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह विश्वास आगे बढ़ा कि यह मंदिर गांव की रक्षा करता है और यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां काली अपने भक्तों को हर तरह की मुसीबत से बचाती हैं।
खासकर काली पूजा के अवसर पर यहां का नजारा किसी मेले जैसा होता है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं। आज भी यह मंदिर अपनी तांत्रिक जड़ों और गहरी आस्था के कारण क्षेत्र के लोगों के लिए एक पवित्र शरणस्थली बना हुआ है।