भागलपुर संग्रहालय में सजी मंजूषा हटिया, लोक कला की अद्भुत छटा देखकर चौंक जाएंगे

भागलपुर संग्रहालय परिसर में रविवार को मंजूषा हटिया और मंजूषा लोक कला प्रदर्शनी का चौथा संस्करण आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय (DACO) और भागलपुर संग्रहालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य अंग संस्कृति की पारंपरिक लोक कला को संरक्षित करना और स्थानीय कलाकारों को सीधे बाजार तक पहुंच प्रदान करना है। हर महीने के पहले रविवार को आयोजित होने वाली इस पहल का नेतृत्व DACO अंकित रंजन कर रहे हैं।
इस प्रदर्शनी में भागलपुर और आसपास के कलाकारों की विभिन्न मंजूषा कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं, जिसमें पारंपरिक चित्रों को आधुनिक रूप के साथ जोड़ा गया था। उद्घाटन समारोह का नेतृत्व बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के पूर्व कुलपति डॉ. अरुण कुमार सिंह ने किया। अन्य गणमान्य लोगों में संगीत नाटक अकादमी से संजय चौधरी और शिक्षाविद् राजीव कांत मिश्रा शामिल थे।
कलाकारों और अतिथियों के विचार
कार्यक्रम के दौरान डॉ. अरुण कुमार सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि मंजूषा लोक कला एक प्रभावशाली और अनूठी परंपरा है, लेकिन इसके बारे में जागरूकता अभी भी सीमित है। उन्होंने कहा कि ऐसे आवर्ती आयोजन अधिक से अधिक लोगों को इस शिल्प से जोड़ने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। DACO अंकित रंजन ने बताया कि मंजूषा हटिया अवधारणा का मुख्य उद्देश्य केवल प्रदर्शनी स्थान प्रदान करना नहीं, बल्कि कलाकारों को सीधे बाजार से जोड़ना है।
आधुनिक उत्पादों का प्रदर्शन
एक महत्वपूर्ण आकर्षण राजीव कांत मिश्रा के मार्गदर्शन में कई कलाकारों द्वारा तैयार किए गए मंजूषा डिजाइन वाले टी-शर्ट का प्रदर्शन था। पारंपरिक लोक कला का आधुनिक कपड़ों के साथ यह मेल बहुत लोकप्रिय साबित हुआ, जिसमें मौके पर ही 20 से अधिक टी-शर्ट बिक गए। इस प्रदर्शनी के सफल आयोजन में अजना कुमारी और कुमार संभव ने समन्वयकों की भूमिका निभाई।