कटिहार के गामी टोला स्थित संतमत सत्संग आश्रम में चल रहा 15 दिवसीय ध्यान साधना शिविर भक्तिमय माहौल में संपन्न हो गया। इस कार्यक्रम का संचालन स्वामी केदार बाबा, सत्य प्रकाश बाबा और बुद्धिनाथ बाबा के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर की मुख्य बातें इस प्रकार हैं: - स्वामी केदार बाबा ने 6 अक्टूबर को मानव जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। - अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. स्वामी सत्य प्रकाश ने धर्म के लोकचार और अध्यात्म पहलुओं को समझाया। - बुद्धिनाथ बाबा ने संतों की संगति के बिना शास्त्रों को न समझ पाने की बात कही। - आयोजकों में गणेश प्रसाद साह और त्रिलोकचंद अग्रवाल ने शिविर की व्यवस्था संभाली।
स्वामी केदार बाबा ने 6 अक्टूबर को संगति को संबोधित करते हुए
मानव जीवन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि
मोक्ष यानी जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति केवल मानव शरीर के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने आगे कहा कि भगवान ने मानव शरीर के भीतर एक आध्यात्मिक मार्ग प्रदान किया है जो देवताओं के दिव्य शरीरों में भी सुलभ नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. स्वामी सत्य प्रकाश ने समझाया कि
धर्म के दो पहलू होते हैं: लोकचार और अध्यात्म। उन्होंने बताया कि
अध्यात्म ही आत्म-साक्षात्कार और मुक्ति प्राप्त करने का साधन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए किसी 'सतगुरु' से मार्गदर्शन लेकर मन को बाहर भटकाने के बजाय अंदर की ओर केंद्रित करना होता है, जबकि केवल कर्मकांडों में लगे रहने से स्थायी शांति नहीं मिलती। उन्होंने चेतावनी दी कि जो मनुष्य अपना ध्यान केवल भोजन, भय, निद्रा और संतानोत्पत्ति तक सीमित रखते हैं, वे पशुओं की तरह जीवन जीते हैं।
बुद्धिनाथ बाबा ने
शास्त्रों के गहरे रहस्य पर प्रकाश डाला और कहा कि
संतों की संगति के बिना इन्हें सही ढंग से नहीं समझा जा सकता है। उन्होंने
नियमित ध्यान, सात्विक जीवन शैली और बुरी आदतों से दूर रहने की वकालत की। इस शिविर की व्यवस्था को संभालने वाले आयोजकों में गणेश प्रसाद साह और त्रिलोकचंद अग्रवाल शामिल रहे।