गंगा में तैरकर आई अद्भुत मां दुर्गा की प्रतिमा, भागलपुर के इस ऐतिहासिक मंदिर में उमड़ी भीड़

भागलपुर के गोपालपुर ब्लॉक के अजमाबाद गांव में एक अनोखा दुर्गा मंदिर स्थित है जो स्थानीय लोककथा और आस्था का प्रतीक है। ग्रामीण इलाकों में इस मंदिर को लेकर लोगों में गहरी श्रद्धा है।
- गंगा नदी से तैरकर आई थी मां दुर्गा की प्रतिमा
- हिलाने पर भी नहीं हिली प्रतिमा तो बनाया गया मंदिर
- साल 1995 में हुई थी मंदिर की आधिकारिक स्थापना
अद्भुत चमत्कार और इतिहास
ग्रामवासियों के अनुसार, एक देवी दुर्गा की प्रतिमा गंगा नदी में तैरते हुए इस स्थल पर पहुंची थी, जो पहले अजमाबाद से होकर बहती थी। जब ग्रामीणों ने प्रतिमा को वहां से हटाने की कोशिश की, तो वह अपनी जगह से बिल्कुल नहीं हिली। इसे एक दैवीय चमत्कार मानते हुए लोगों ने उसी स्थान पर एक मंदिर का निर्माण कर दिया ताकि देवी को स्थापित किया जा सके। इस मंदिर की आधिकारिक स्थापना साल 1995 में जमींदार बाबू सिंगेश्वर नाथ चौधरी के नाम पर की गई थी। वर्तमान में इस मंदिर की देखरेख मातृ शर्मा उर्फ बुद्धदेव शर्मा द्वारा की जाती है। यह स्थल इस क्षेत्र में सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक एकता का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है और हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
दुर्गा पूजा की तैयारी और समिति
दुर्गा पूजा के सफल आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इस समिति की कमान महंत जी के हाथ में है जो अध्यक्ष यानी पूजकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं। उनके साथ सचिव सुभाष राय और कोषाध्यक्ष सुरेंद्र राय भी शामिल हैं। इस आयोजन को सुचारू और भव्य रूप से संपन्न कराने में रितेश राय, शंकर शर्मा, महेश शर्मा, मुन्ना कुमार, कुई राय और सुनील कुमार जैसे अन्य सक्रिय सदस्य भी अपना योगदान दे रहे हैं।