बिहार के पारंपरिक विश्वविद्यालयों में पांच से सात साल से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की सेवा नियमित करने और सेवा शर्तें एक समान करने की मांग को लेकर एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह ने 8 अक्टूबर 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री को एक औपचारिक आवेदन सौंपा है। यह कदम लगभग 3,000 अतिथि प्रोफेसर्स की स्थिति को लेकर चल रही उच्च स्तरीय बैठकों के बाद उठाया गया है।
- एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह ने 8 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को आवेदन दिया
- लगभग 3,000 अतिथि प्रोफेसर्स की सेवा नियमित करने की मांग की गई
- अतिथि शिक्षकों के लिए 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया
- नए 2026 के नियमों और संविदा प्रावधानों का विरोध जारी है
2 सितंबर 2026 को डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री से मिलकर 65 वर्ष की आयु तक सेवा निरंतर रखने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद, 9 सितंबर 2026 को उन्होंने बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रामवचन राय के साथ मिलकर उच्च शिक्षा मंत्री श्री संजय सिंह टाइगर से मुलाकात की। उस बैठक के दौरान उन्होंने नियमितीकरण के लिए एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें 1976, 1980 और 1982 में अस्थायी सहायक प्राध्यापकों के नियमितीकरण के ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला दिया गया और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल के सफल मॉडलों का उल्लेख किया गया।
राज भवन की एक समिति द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावित 'बिहार यूनिवर्सिटीज फिक्स्ड टर्म फैकल्टी एंगेजमेंट स्टेट्यूट-2026' के कारण यह मुद्दा विवादित बना हुआ है। इस कानून को 19 जून 2026 को पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य वर्तमान व्यवस्था को योग्यता-आधारित, निश्चित अवधि की नियुक्तियों से बदलना है। भागलपुर में पीएचडी होल्डर एसोसिएशन और टीएमबीयू गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन सहित अतिथि शिक्षकों ने इन नियमों का कड़ा विरोध किया है और इन्हें यूजीसी दिशानिर्देशों के असंगत बताया है। पीएचडी होल्डर एसोसिएशन द्वारा 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद, 26 अगस्त 2026 को वेतनमान, महंगाई भत्ते और सेवा अवधि से संबंधित मांगों की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने पर सहमति बनी थी। 8 सितंबर 2026 को प्रदर्शनों के बाद राज भवन के अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बावजूद, शिक्षकों ने 2026 के नियुक्ति नियमों को वापस लेने और मौजूदा कर्मचारियों के स्थायी समायोजन की मांग जारी रखी है।