मुंगेर में जैन श्रद्धालुओं ने पर्युषण पर्व का पांचवां दिन बहुत धूमधाम से मनाया और इसे उत्तम सत्य धर्म को समर्पित किया। इस खास मौके पर क्या खास हुआ, आइए जानते हैं मुख्य बातें: - पर्युषण पर्व का पांचवां दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया गया। - भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अभिषेक, पूजा और आरती हुई। - श्रद्धालुओं ने दैनिक जीवन में सच्चाई के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
रविवार को जैन श्रद्धालुओं ने पर्युषण पर्व के पांचवें दिन भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की।
दिन की शुरुआत भगवान पार्श्वनाथ के अनुष्ठानिक अभिषेक, पूजा और आरती के साथ हुई। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने अपने दैनिक जीवन में सच्चाई के रास्ते पर चलने की गहरी कसम खाई। इस आयोजन में निर्मल जैन, भवेश जैन, अजय जैन, अभिषेक जैन, अविनाश जैन, गट्टू जैन, निर्मल जैन, शांतिलाल जैन, राजेश जैन और मुकेश जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
दिन के महत्व के बारे में बात करते हुए निर्मल जैन ने बताया कि उत्तम सत्य धर्म हमें सिखाता है कि
सत्य केवल बोलने की बात नहीं है, बल्कि यह विचारों, वचनों और कर्मों की पवित्रता में बसता है। जैन शास्त्रों के अनुसार, सत्य वह है जो कल्याणकारी, संयमित और अहिंसक हो। इस धर्म का पालन करने का मतलब है आत्मा के सच्चे स्वरूप को पहचानना और झूठ तथा छल-कपट को छोड़ देना। निर्मल जैन ने आगे जोर देकर कहा कि
जीवन में सच्चाई को अपनाने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। उन्होंने चेतावनी दी कि दूसरों को झूठ बोलकर धोखा देना खुद को धोखा देने के बराबर है और यही दोहराया कि सत्य ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने सभी अनुयायियों से उत्तम सत्य के व्रत का पालन करने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि किसी को भी कभी दूसरों को धोखा नहीं देना चाहिए। श्रद्धालुओं को याद दिलाया गया कि पर्युषण पर्व एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो भगवान महावीर के अहिंसा और करुणा के मूल सिद्धांतों पर आधारित 'जीने दो और जीने दो' का संदेश देता है।