नाथनगर में सड़क और नाले की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनोखा सत्याग्रह

MyBhagalpur Team13 October 20262 min read0 viewsCity Local
नाथनगर में सड़क और नाले की मांग को लेकर ग्रामीणों का अनोखा सत्याग्रह

भागलपुर के नाथनगर में कंझिया मोड़ पर मंगलवार सुबह ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लंबे समय से लंबित सड़क, नाला और सर्विस रोड की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया।

प्रमुख बातें:

  • मुंह पर लाल कपड़ा बांधकर ग्रामीणों ने किया चक्काजाम
  • मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन पर बांस-बल्ला लगाकर आवागमन ठप किया
  • सुबह करीब 8 बजे शुरू हुए जाम से वाहनों की लंबी कतारें लगीं
  • पुलिस के समझाने के बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे

अनोखा विरोध प्रदर्शन


विरोध का तरीका बेहद आक्रामक और प्रतीकात्मक था। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और पुरुषों ने अपने मुंह पर लाल कपड़ा बांध रखा था। अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी करते हुए ग्रामीणों ने मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन पर बांस-बल्ला लगा दिया और आवागमन को पूरी तरह से ठप कर दिया। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुए इस चक्काजाम के कारण देखते ही देखते फोरलेन के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। इनमें कई यात्री बसें, व्यावसायिक ट्रक और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं भी फंस गईं, जिससे आम राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों की मुख्य समस्याएं


आंदोलन स्थल पर जुटे ग्रामीणों का कहना है कि फोरलेन निर्माण के बाद से स्थानीय स्तर पर सड़क, नाला और सर्विस रोड नहीं होने की वजह से उनका जीना मुहाल हो गया है। जलजमाव और मुख्य सड़क पर आने-जाने में हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार ध्यान आकर्षित कराए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसके कारण आखिरकार उन्हें सत्याग्रह और सड़क जाम का रास्ता अपनाना पड़ा।

पुलिस प्रशासन की कोशिश और ग्रामीणों का रुख


सड़क जाम और हंगामे की सूचना मिलते ही मधुसूदनपुर थाना की पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने, शांत कराने और जाम हटाने की काफी कोशिश की। पुलिस ने आश्वासन भी दिया कि उनकी मांगें सक्षम प्राधिकार तक पहुंचाई जाएंगी, लेकिन प्रदर्शनकारी टस से मस नहीं हुए। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक संबंधित विभाग के वरीय अधिकारी खुद मौके पर नहीं आते और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनकर लिखित या ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। ग्रामीणों के इस कड़े रुख के कारण समाचार लिखे जाने तक फोरलेन पर जाम की स्थिति बनी हुई थी और प्रशासन वैकल्पिक रास्तों से यातायात को बहाल करने की कोशिशों में जुटा है। सभी की नजरें अब प्रशासनिक अधिकारियों के रुख और उनके द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।

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