भागलपुर में गुरुवार को महात्मा गांधी के अंग क्षेत्र में आगमन के सौ साल पूरे होने पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम युग चेतना फाउंडेशन, अंग-जन-गण और अंगिका सभा फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया। इस खबर में मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: - अंगिका भाषा को मान और मान्यता दिलाने के लिए जन आंदोलन चलाने पर जोर दिया गया। - गांधी शांति फाउंडेशन केंद्र के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता ने अंगिका को रोजगार से जोड़ने की बात कही। - डॉ. मनोज मीता को गांधी जी की आत्मकथा का अंगिका में अनुवाद करने के लिए सम्मानित किया गया। - इस दिवाली अंगिका के सम्मान में दीया जलाने का प्रस्ताव पास हुआ।
पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष डॉ. शंभू दयाल खेतान ने
अंगिका भाषा को मान और मान्यता दिलाने के लिए जोरदार जन आंदोलन शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया। गांधी शांति फाउंडेशन केंद्र के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता ने अंगिका को बढ़ावा देने के प्रयासों में जनता, खासकर युवाओं को जोड़ने के महत्व को रेखांकित किया। गुप्ता ने सुझाव दिया कि मंजूषा कला शैली की तरह ही
अंगिका भाषा को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए पहल की जानी चाहिए।
लेखक डॉ. अमरेंद्र ने बताया कि
अंगिका बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में बोली जाती है, और इतनी लोकप्रिय भाषा के प्रति सरकार की उदासीनता चिंता का विषय है। संगोष्ठी के दौरान
इस दिवाली अंगिका के सम्मान में एक दीया जलाने का प्रस्ताव पास किया गया।
कार्यक्रम के दौरान
डॉ. मनोज मीता को महात्मा गांधी की आत्मकथा का अंगिका में अनुवाद करने के लिए सम्मानित किया गया। इस सभा में अंग-जन-गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुधीर मंडल, सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार प्रसून लतांत, शिवनंदन खेतान, सामाजिक कार्यकर्ता लखन लाल पाठक, प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल, शिक्षाविद राजीव कांत मिश्रा और गीतकार राजकुमार सहित कई प्रमुख हस्तियों ने भाषा के समर्थन में एकता की अपील की।