गंगा का भयानक रूप देखकर चौंक जाएंगे, नवगछिया में ढह रहे पक्के मकान

MyBhagalpur Team12 October 20262 min read0 viewsSad/Bad
गंगा का भयानक रूप देखकर चौंक जाएंगे, नवगछिया में ढह रहे पक्के मकान

भागलपुर से बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ 12 अक्टूबर को गंगा नदी के घटते जलस्तर के साथ ही खरीक प्रखंड के राघोपुर पंचायत में कटाव ने भारी तबाही मचा रखी है। नदी में उठने वाले खतरनाक भंवर, जिसे स्थानीय भाषा में 'घुरना' या 'कटघुरना' कहा जाता है, के कहर से पक्के मकान ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं। शुक्रवार की देर शाम से शुरू हुआ यह तांडव रविवार देर रात तक जारी रहा, जिससेछोटी अलालपुर निवासी अविनाश कुमार मंडल और बाल मुकुंद मंडल के मजबूत पक्के मकान देखते ही देखते गंगा नदी में विलीन हो गए। इससे पहले इस विनाशकारी कटाव की चपेट में रेल बांध, ब्रह्म बाबा स्थान और बजरंगबली स्थान भी आ चुके हैं। वर्तमान में राघोपुर, शंकरपुर अलालपुर और छोटी अलालपुर गांवों के करीब 30 घरों पर कटाव का सीधा खतरा मंडरा रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत है। कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि शुक्रवार को पूर्व जिला पार्षद प्रेमशीला देवी, उदय मंडल, पुतुल मंडल, मिथिलेश क्रांति और अनिल मंडल समेत 10 लोगों के आशियाने गंगा में समा गए थे।

कटाव का कारण और घूर्णी प्रवाह

ग्रामीण रंजीत मंडल, त्रिलोकी नाथ दिवाकर और अविनाश कुमार मंडल ने बताया कि पानी गोल-गोल घूमते हुए किनारे की मिट्टी को अंदर ही अंदर काट देता है। पहले मकान के नीचे की जमीन पूरी तरह खोखली हो जाती है और जैसे ही नींव का सहारा खत्म होता है, आरसीसी से बने मजबूत मकान भी पल भर में जमींदोज हो जाते हैं। विशेषज्ञों और भू-वैज्ञानिक दृष्टि से नदी में उठने वाले इस घूर्णी प्रवाह के पीछे नदी के बहाव और मिट्टी की कमजोरी से जुड़े महत्वपूर्ण कारण हैं। उल्लेखनीय है कि घूर्णी प्रवाह यानी भंवर नदी की मुख्य धारा की दिशा, मोड़ और तल की असमान बनावट के कारण बनता है। यह तेज बहाव किनारे की कमजोर मिट्टी को उखाड़ देता है। खोखली नींव गंगा के तल में रेत, गाद और मिट्टी की परतें होती हैं। भंवर सबसे पहले नीचे की कमजोर परतों को काटता है, जिससे ऊपर की जमीन अचानक धंस जाती है। जलस्तर घटने के दौरान भी कटाव जारी रहने का कारण इंजीनियरिंग में 'रैपिड ड्रॉडाउन' कहलाता है। बाढ़ के समय मिट्टी में पानी सोखने से अंदरूनी दबाव बढ़ जाता है। पानी घटने पर बाहरी सहारा कम हो जाता है, जिससे तट अस्थिर होकर ढह जाते हैं। नदी के मोड़ पर मुख्य धारा का दबाव बाहरी किनारे की ओर बढ़ता है। रेत और गाद जमा होने से प्रवाह का रास्ता बदल जाता है और नए इलाकों में कटाव तेज होता है।

ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें

इस भीषण आपदा ने राघोपुर और अलालपुर के ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। बेघर हुए लोग खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हैं, वहींजिन 30 घरों पर खतरा मंडरा रहा है, वहां के लोग खौफ के साए में जी रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन और सरकार इन प्रभावित परिवारों को बचाने और इस खतरनाक कटाव को रोकने के लिए क्या ठोस और स्थायी कदम उठाती है।

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