गिद्धौर के ऐतिहासिक परसंडा दुर्गा मंदिर में नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी के दर्शन के लिए दूर-दूर से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। - उलय नदी के तट पर स्थित है यह ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर - चंदेल राजवंश से जुड़ा है मंदिर का इतिहास - सप्तमी तिथि को हुई थी विशेष वैदिक पूजा - मंदिर परिसर में लगा है पारंपरिक मेला और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुबह से ही श्रद्धालु मंदिर में दंडवत करते हुए मां का आशीर्वाद ले रहे हैं और अपनी मनोकामनाएं मांग रहे हैं। यह मंदिर सदियों पुराना आस्था का केंद्र है जहां मां परसंडा के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा है।
नवरात्रि के सातवें दिन झारखंड के देवघर स्थित चंदेल रियासत के विद्वान पंडित महेश्वर चरण महाराज और पन्ना लाल मिश्रा तथा उनकी टीम द्वारा पूरे वैदिक विधान के साथ सप्तमी निशा पूजा की गई। इसके बाद मंदिर के कपाट आम लोगों के दर्शन के लिए खोल दिए गए। रविवार को जिले भर से आए श्रद्धालुओं ने मां महागौरी को फूल, बेलपत्र और नैवेद्य अर्पित किए और सुख-समृद्धि की कामना की। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां परसंडा के दरबार में प्रार्थना करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
इस स्थल पर एक पारंपरिक मेले का भी आयोजन किया गया है जिसमें टावर स्विंग, ब्रेक डांस राइड, डोरा डोरा, मिकी माउस और मिठाइयों, खिलौनों तथा सौंदर्य प्रसाधनों की दुकानें आकर्षण का केंद्र हैं। मंगलवार को महाष्टमी के मौके पर बलि प्रदान की परंपरा निभाई जाएगी। इस पूरे आयोजन की व्यवस्था शरदीय दुर्गा पूजा सह लक्ष्मी पूजा समिति द्वारा की जा रही है। भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय जिला प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे मेला परिसर की निगरानी सीसीटीवी से करने के निर्देश दिए हैं।