प्रो. डॉ. प्रेम प्रभाकर की 5वीं पुण्यतिथि पर स्मृति सभा, उनके सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को किया गया याद
भागलपुर में प्रो. डॉ. प्रेम प्रभाकर की 5वीं पुण्यतिथि पर स्मृति सभा आयोजित की गई, जहां उनके सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को याद किया गया।

भागलपुर में सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था 'परिधि' के तत्वावधान में प्रख्यात शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और संस्कृतिकर्मी प्रो. डॉ. प्रेम प्रभाकर की 5वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस मौके पर एक गरिमामयी स्मृति सभा का आयोजन किया गया, जिसमें उनके पूर्व छात्रों, सहकर्मियों और परिजनों ने शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने डॉ. प्रभाकर के उस व्यक्तित्व को याद किया जिसने शिक्षा, समाज सेवा और कला के बीच एक सेतु का काम किया था।
सभा के दौरान डॉ. प्रभाकर के संघर्षपूर्ण और सक्रिय सामाजिक जीवन पर चर्चा हुई। बताया गया कि उन्होंने अपने सामाजिक सफर की शुरुआत बीड़ी मजदूर यूनियन के पदाधिकारी के तौर पर की थी। इसके बाद वे गंगा मुक्ति आंदोलन, झुग्गी झोपड़ी संघर्ष समिति और संपूर्ण क्रांति आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण अभियानों से गहराई से जुड़े रहे। उनके साथियों ने याद किया कि डॉ. प्रभाकर के पास आते ही शिक्षक और छात्र के बीच की दूरी खत्म हो जाती थी, जिससे छात्रों के व्यक्तित्व निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका रही।
रेडियो से लेकर चित्रकला तक: एक बहुआयामी व्यक्तित्व
डॉ. प्रभाकर की पहचान केवल एक प्रोफेसर के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहतरीन कलाकार और प्रसारक के रूप में भी थी। उनके रेडियो करियर का जिक्र करते हुए बताया गया कि आकाशवाणी के 'ग्राम जगत' कार्यक्रम में 'माखन भाई' के रूप में वे बेहद लोकप्रिय थे। उनका फीचर 'मेघा छाए आधी रात' उस दौर में काफी चर्चित रहा। इसके अलावा, उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता भी की और अंगिका भाषा व साहित्य के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहने के साथ-साथ वे स्नातकोत्तर अंगिका विभाग और पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष भी रहे। कला के क्षेत्र में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही; उन्होंने 'माध्यम' संस्था की स्थापना की और पहली 'मंजूषा चित्र कला' को अस्तित्व में लाने में अहम भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के समन्वयक के तौर पर उन्होंने कई युवा महोत्सव आयोजित किए, जिससे स्थानीय युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
इस श्रद्धांजलि सभा में उदय, सुनील कुमार रंग, शिशुपाल भारती, मो. तकी अहमद जावेद, स्मिता कुमारी, हबीब मुर्शिद खान, मनोज कुमार, मृदुला सिंह, प्रसून लतांत और उनके परिजन सहित शहर के कई प्रबुद्ध लोग मौजूद रहे।