दिवाली की तैयारी: पूर्णिया के बाजारों में मिट्टी के दीयों की बढ़ी भारी मांग

दिवाली से पहले पूर्णिया के बाजारों में मिट्टी के दीयों की रौनक बढ़ गई है। पारंपरिक और डिजाइनर दीयों की खरीदारी के लिए उमड़ रही है भीड़।

Puja Singh6 November 20262 min read0 viewsCity Local
दिवाली की तैयारी: पूर्णिया के बाजारों में मिट्टी के दीयों की बढ़ी भारी मांग

दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही पूर्णिया के बाजारों में रौनक देखते ही बन रही है। शहर के कोने-कोने में पूर्णिया दीवाली मिट्टी के दीये की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे बाजारों में जबरदस्त चहल-पहल देखी जा रही है। लोग अपने घरों को रोशन करने के लिए पारंपरिक दीयों के साथ-साथ आधुनिक और रंगीन डिजाइनों की तलाश में बाजारों का रुख कर रहे हैं।

शहर के गुलाब बाग, खुश्कीबाग, भट्टा बाजार, मधुबनी बाजार, पॉलिटेक्निक चौक, लाइन बाजार, जनता चौक, बहुमंजिला बाजार, विकास बाजार और कचहरी रोड जैसे प्रमुख इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण बाजारों में भी दीयों की दुकानें सजी हुई हैं। ग्राहकों के बजट और पसंद को देखते हुए बाजार में हर तरह के विकल्प मौजूद हैं। साधारण मिट्टी के दीये 1 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति पीस तक मिल रहे हैं, जबकि विशेष 'चौमुखी' दीयों की कीमत 50 रुपये से 150 रुपये के बीच है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

इस बार बाजार में केवल साधारण दीये ही नहीं, बल्कि फूलों के आकार के, नक्काशीदार और कलात्मक रंगों वाले सजावटी दीयों की भी काफी मांग है। कई दीयों को बेहद खूबसूरत रंगों से रंगा गया है, जो घर की सजावट में चार चांद लगा रहे हैं। हालांकि बाजार में बिजली की रंग-बिरंगी लड़ियां और आधुनिक लाइट्स उपलब्ध हैं, लेकिन लोगों का झुकाव अब भी पारंपरिक मिट्टी के दीयों की ओर ही ज्यादा है।

मिट्टी के इन दीयों की बढ़ती मांग ने स्थानीय कुम्हारों और छोटे व्यापारियों के चेहरे पर खुशी ला दी है। कारीगर पिछले कई दिनों से दिन-रात मेहनत कर इन दीयों को तैयार कर रहे हैं। दीयों की कीमत मिट्टी की उपलब्धता, मेहनत और डिजाइन की बारीकी के आधार पर तय की जा रही है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ते देख लोग अब ईको-फ्रेंडली विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे परंपरा और आधुनिक सौंदर्य का एक बेहतरीन मेल देखने को मिल रहा है।

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