भागलपुर में कचरा फेंकने पर भारी गुस्सा! जानिए क्या है पूरा मामला

भागलपुर के खरमंचक इलाके के लोगों और सुबह टहलने वालों ने जिला स्कूल रोड पर जैविक कचरे के लगातार फेंके जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। स्थानीय पत्रकार अंकित आनंद की 1 सितम्बर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार कचरे का यह ढेर बहुत बढ़ गया है जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि घंटाघर के पास दुकान लगाने वाले फल विक्रेता इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं जो रात के अंधेरे में सड़े और बचे हुए फल फेंक जाते हैं। सुबह होते ही यह कचरा सड़ने लगता है जिससे पूरे इलाके में गंदी बदबू फैल जाती है और पैदल चलने वालों के लिए सड़क से निकलना मुश्किल हो जाता है। प्रदर्शनकारी अब भागलपुर नगर निगम से सफाई व्यवस्था सुधारने और अवैध रूप से कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
कचरा प्रबंधन पर प्रशासन की तैयारी
नगर निगम इस समय कचरा प्रबंधन के मामले में बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 30 अगस्त 2026 तक नगर निगम मुसाहरी घाट और बाजबारी में 18 करोड़ रुपये की लागत से दो आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा है जिनकी क्षमता रोज 50 टन होगी। इसके अलावा सफाई सेवाओं के लिए 222 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया जा चुका है और छट पूजा के बाद नवंबर के आखिर में नई एजेंसी काम संभाल सकती है। इस नए चार साल के अनुबंध में हर वार्ड को पांच ई-रिक्शा देने की बात है और ठेकेदार कानूनी तौर पर वार्ड पार्षदों की सफाई से जुड़ी शिकायतों को तुरंत हल करने के लिए बाध्य होंगे।
सरकार के नए कदम और कड़े नियम
इसके अलावा बिहार कैबिनेट ने 13 अगस्त 2026 को जैविक कचरे से ऊर्जा बनाने के लिए भागलपुर में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने की मंजूरी दी है। हालांकि अधिकारी इन लंबे समय के समाधानों की तरफ बढ़ रहे हैं लेकिन 2016 और 2026 के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत यह जरूरी है कि व्यावसायिक संस्थान अपने स्तर पर ही जैविक कचरे का प्रबंधन करें। शहर में पहले भी सार्वजनिक रूप से कचरा फेंकने पर कड़े जुर्माने लागू किए गए हैं जिसमें गलत तरीके से कचरा फेंकने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और पांच साल तक की जेल की सजा हो सकती है।