भागलपुर के सबौर कॉलेज के पास जमीन के तीन दशक पुराने विवाद को लेकर वाराणसी में रह रहे बुजुर्ग पवन कुमार सिंहानिया जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और न्यायालय के आदेश प्रस्तुत करते हुए जमीन की स्थिति की जांच कराने तथा मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।
- वाराणसी से भागलपुर पहुंचे बुजुर्ग पवन कुमार सिंहानिया
- सबौर कॉलेज के पास पैतृक जमीन पर निर्माण का आरोप
- तीन दशक पुराने विवाद को लेकर पहुंचे जिलाधिकारी कार्यालय
- न्यायालय के आदेश और दस्तावेजों के साथ प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
भागलपुर, 29 सितंबर (हि.स.)। जिले के सबौर कॉलेज के पास जमीन के एक तीन दशक पुराने विवाद को लेकर वाराणसी में रह रहे बुजुर्ग पवन कुमार सिंहानिया जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और न्यायालय के आदेश प्रस्तुत करते हुए जमीन की स्थिति की जांच कराने तथा मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है।
सिंहानिया का आरोप है कि विवादित भूमि पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जबकि इस जमीन को लेकर न्यायालय में लंबे समय से मामला लंबित रहा है। सिंहानिया के मुताबिक, सबौर कॉलेज के पूरब स्थित करीब 24 से 39 डिसमिल जमीन उनके पूर्वजों की संपत्ति रही है। उनका दावा है कि पुराने भू-सर्वेक्षण के दौरान रिकॉर्ड में हुई त्रुटि के कारण जमीन की प्रविष्टि सरकारी खाते में हो गई थी। इसी त्रुटि को सुधारने और जमीन पर स्वामित्व के लिए उनके परिवार की ओर से वर्ष 1993-94 के आसपास न्यायालय में मामला दायर किया गया था।
पवन कुमार सिंहानिया का कहना है कि एक लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद न्यायालय से उनके पक्ष में आदेश भी प्राप्त हुआ था। इसके बाद संबंधित जमीन को लेकर उच्च न्यायालय से यथास्थिति बनाए रखने और निर्माण से संबंधित निर्देश जारी किए गए थे।
बुजुर्ग का आरोप है कि वर्ष 2016 के आसपास जब कॉलेज की बाउंड्री का विस्तार किया जा रहा था, तब विवादित जमीन का हिस्सा भी घेराबंदी में शामिल कर लिया गया था। उन्होंने उस समय भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। हाल ही में जब वह बनारस से अपनी जमीन की स्थिति देखने भागलपुर पहुंचे, तो वहां निर्माण कार्य चलता देख दंग रह गए। इसके बाद उन्होंने तुरंत जिला प्रशासन और सबौर थाना में लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई।
दूसरी ओर, किसी भी शैक्षणिक संस्थान द्वारा जमीन पर निर्माण या बाउंड्री से संबंधित कार्रवाई किस रिकॉर्ड और अनुमति के आधार पर की गई है, यह भी प्रशासनिक जांच का विषय होगा। फिलहाल कॉलेज प्रशासन की ओर से जमीन के स्वामित्व या निर्माण को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जमीन से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई का मुख्य आधार राजस्व रिकॉर्ड और सक्षम न्यायालय के आदेश ही होते हैं, इसलिए इस पूरे मामले में अंचल कार्यालय (सीओ) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संबंधित राजस्व अधिकारी जमीन के खतियान, जमाबंदी, नक्शा और न्यायालय के आदेशों की प्रमाणित प्रतियों का मिलान करेंगे। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि विवादित जमीन पर निर्माण वैध है या अवैध। जिला प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित भूमि का वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड क्या कहता है और मौके पर चल रहे निर्माण के संबंध में क्या कार्रवाई की जानी है।