भागलपुर के नगर पंचायत सबौर क्षेत्र में काम करने वाले पंप हाउस ऑपरेटरों को पिछले आठ महीनों से मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
- आठ महीने से वेतन नहीं मिलने से ऑपरेटर परेशान हैं।
- सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत कुमार झा ने सहयोग पोर्टल और नगर पंचायत में शिकायत दर्ज कराई है।
- नियमों के अनुसार वेतन और अन्य लाभ मिलने चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत कुमार झा ने प्रभावित मजदूरों की तरफ से आगे आकर इस मामले में हस्तक्षेप किया है। सुजीत कुमार झा ने सरकार के 'सहयोग पोर्टल' पर इस गैर-भुगतान के मुद्दे की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और नगर पंचायत सबौर के अधिकारियों को भी एक आवेदन सौंपा है। यह कदम स्थानीय प्रशासनों का ध्यान इन ऑपरेटरों की समस्या की तरफ खींचने के लिए उठाया गया है, जिन्हें लगभग नौ महीने से उनकी आजीविका से वंचित रखा गया है।
1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक के क्षेत्रीय मजदूरी मानकों के अनुसार, बिहार में पंप ऑपरेटरों को अर्ध-कुशल श्रमिकों की श्रेणी में रखा गया है। इन्हें लगभग 452 रुपये प्रतिदिन का न्यूनतम दैनिक वेतन मिलना चाहिए, जो 26 दिन की सेवा के लिए लगभग 11,752 रुपये मासिक वेतन बनता है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में पंप हाउस संचालन के लिए तय किए गए नियमों के अनुसार मजदूरी 487 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होनी चाहिए। भुगतान अगले महीने के सात दिनों के भीतर और अनिवार्य ईपीएफ (EPF) तथा ईएसआईसी (ESIC) योगदान के साथ किया जाना चाहिए। सबौर में भुगतान न होना इन प्रचलित रोजगार मानकों का सीधा उल्लंघन है।