भागलपुर के ऐतिहासिक सैंडिस कंपाउंड में ट्रेड फेयर खत्म होने के बाद भारी गंदगी फैल गई है जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा है। सैंडिस कंपाउंड मैदान कचरे के ढेर में बदल गया है और वहां प्लास्टिक व सड़े-गले खाद्य पदार्थों की दुर्गंध आ रही है।
भागलपुर में शहर का फेफड़ा और हृदय स्थल कहे जाने वाले ऐतिहासिक सैंडिस कंपाउंड इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में यहां आयोजित हुआ भव्य ट्रेड फेयर करीब बीस दिनों तक चलने के बाद समाप्त तो हो गया, लेकिन आयोजक और प्रबंधन पूरे मैदान को कचरे के ढेर में तब्दील कर चले गए। स्थिति यह है कि जहां लोग खुली हवा में सांस लेने आते थे, वहां अब प्लास्टिक, सड़े-गले खाद्य पदार्थ और कचरे की दुर्गंध से सांस लेना दूभर हो गया है।
सैंडिस कंपाउंड में प्रवेश और सुविधाओं के नाम पर आम जनता की जेब ढीली की जा रही है। एक निश्चित समय के बाद परिसर में आने के लिए एंट्री फीस ली जाती है। इसके अलावा, गाड़ियों की पार्किंग के लिए भी प्रति घंटे के हिसाब से भारी-भरकम भुगतान करना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब जनता से हर बात का पैसा वसूला जा रहा है, तो इस ऐतिहासिक मैदान की देखरेख में इतनी बड़ी लापरवाही क्यों बरती जा रही है? करोड़ों रुपये की लागत से स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित किए गए इस मैदान का संचालन करने वाली निजी कंपनी अब सीधे तौर पर स्थानीय लोगों के निशाने पर है।
उल्लेखनीय है कि रोजाना सुबह और शाम यहां हजारों की संख्या में स्वास्थ्य लाभ और वॉक के लिए आने वाले शहरवासियों में भारी आक्रोश है। तिलकामांझी निवासी बिनय कुमार का कहना है कि हम यहां सुबह शुद्ध हवा के लिए आते हैं, लेकिन फेयर खत्म होने के बाद से चारों तरफ सिर्फ प्लास्टिक की थैलियां और कचरा बिखरा पड़ा है। पार्क संचालन कंपनी सिर्फ पैसे वसूलना जानती है, सफाई के नाम पर यहां शून्य व्यवस्था है। वरिष्ठ नागरिक एवं नियमित मॉर्निंग वॉकर रमेश यादव का कहना है कि पार्किंग के लिए हर घंटे पैसे लिए जाते हैं, लेकिन हमारी गाड़ियों की सुरक्षा और यहां की सफाई के लिए कोई जवाबदेह नहीं है। ट्रेड फेयर से कंपनी ने लाखों कमाए, लेकिन सैंडिस कंपाउंड को बर्बाद करके छोड़ दिया। इस अव्यवस्था ने स्मार्ट सिटी भागलपुर के दावों की पोल खोल कर रख दी है।
जागरूक नागरिकों का कहना है कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के बाद मैदान को पूर्व की स्थिति में साफ-सुथरा सौंपना आयोजकों और संचालन कंपनी की जिम्मेदारी होती है। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर पूरे परिसर को ऐसे ही छोड़ दिया गया है। शहरवासी अब नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि संचालन कंपनी पर जुर्माना लगाया जाए और जल्द से जल्द इस धरोहर को साफ कर आम जनता के लिए रहने योग्य बनाया जाए।