भागलपुर में चीनी के दाम बढ़कर 68 रुपये किलो हुए

MyBhagalpur Team21 August 20262 min read31 viewsBusiness
भागलपुर में चीनी के दाम बढ़कर 68 रुपये किलो हुए

भागलपुर में त्योहारी मांग और सप्लाई की कमी के कारण 21 अगस्त 2026 तक खुदरा चीनी की कीमतें बढ़कर 68 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जो पिछले 12 दिनों में 24 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी वृद्धि को दर्शाती है। बाजार के जानकारों और व्यापारियों का मानना है कि इस उतार-चढ़ाव का कारण एथेनॉल उत्पादन की अधिक जरूरत और त्योहारी सीजन से पहले एडवांस में भारी खरीदारी है। देश स्तर पर कुछ इलाकों में चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं, जबकि 18 अगस्त को पूरे देश की औसत खुदरा कीमत करीब 52.3 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई थी। बाजार को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना ड्यूटी आयात की मंजूरी दे दी है। इसके अलावा 30 नवंबर 2026 तक पूरे देश के डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा तय कर दी गई है। 20 अगस्त से लागू हुए नए नियमों के तहत महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा काम करने वाले व्यापारियों को 15 दिन से ज्यादा स्टॉक रखने की मनाही है। बिहार सरकार ने जिलाधिकारियों और मिल मालिकों को इन सीमाओं का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है और चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।

थोक कीमतों में बढ़ोतरी और कम स्टॉक

ये कदम थोक कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद उठाए गए हैं, जिसमें महाराष्ट्र के कोल्हापुर में अगस्त की शुरुआत से दाम 20 प्रतिशत बढ़कर 100 किलोग्राम के लिए 5,350 रुपये पर पहुंच गए हैं। जानकारों के अनुसार अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक चलने वाले मौजूदा चीनी सीजन में आखिरी स्टॉक रिकॉर्ड कम यानी 32 लाख मीट्रिक टन है, जो जरूरी 60 लाख मीट्रिक टन से काफी कम है। इस संकट पर अरविंद केजरीवाल और कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला जैसी हस्तियों ने आलोचना की है और गन्ने के रस को एथेनॉल उत्पादन में भेजने को इस कमी का जिम्मेदार ठहराया है। वहीं दूसरी ओर, बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने यह बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया कि देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण चीनी के दाम बढ़ने का लोगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन सहित कई उद्योग संगठनों का कहना है कि इस समय 30 से 35 प्रतिशत गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में हो रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए चीनी की उपलब्धता और कम हो गई है।

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