पूर्णिया में खुदरा चीनी के दाम में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। केवल दो हफ्ते में चीनी का भाव लगभग 46 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है। स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, कीमत धीरे-धीरे बढ़कर पहले 54 रुपये और फिर 65 रुपये हुई, जिसके बाद यह वर्तमान में 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। 14 दिन की इस अवधि में यह बढ़ोतरी करीब 24 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है।
- दो हफ्ते में 46 रुपये से बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम हुई चीनी।
- राष्ट्रीय रुझान, त्योहारी मांग और आपूर्ति चिंताओं के कारण बढ़े दाम।
- सीमांचल और कोसी क्षेत्र में गुलाबबाग मंडी है मुख्य थोक वितरण केंद्र।
- मिठाइयों के दाम बढ़ने की आशंका और जनता की सरकारी हस्तक्षेप की मांग।
यह मूल्य वृद्धि राष्ट्रीय रुझानों को दर्शाती है, जहां त्योहारी मांग, आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं और अगस्त में चीनी मिलों के लिए बिक्री कोटा को लेकर आशंकाओं ने थोक दरों को ऊपर धकेल दिया है। 17 अगस्त तक उत्तर प्रदेश में मिल स्तर पर चीनी की कीमतें 5,450 से 5,520 रुपये प्रति क्विंटल और महाराष्ट्र में 4,830 से 4,860 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गईं। जमाखोरी और सट्टेबाजी से निपटने के लिए सरकार ने चीनी व्यापारियों के वास्ते स्टॉक सीमा लागू कर दी है।
पूर्णिया में गुलाबबाग मंडी थोक चीनी वितरण के लिए मुख्य केंद्र के रूप में काम करती है। यह मंडी पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा और सुपौल सहित सीमांचल और कोसी क्षेत्रों के किराना खुदरा विक्रेताओं को सामान की आपूर्ति करती है। इस बाजार में पहुंचने वाली चीनी रुड़की और महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र सहित विभिन्न मिल क्षेत्रों से आती है।
स्थानीय हलवाइयों और दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि बढ़ती लागत का असर रसगुल्ला, जलेबी, पेड़ा और बर्फी जैसी मिठाइयों की कीमत पर निश्चित रूप से पड़ेगा। व्यापारियों का कहना है कि यदि यह ऊपर की ओर रुझान जारी रहा, तो इसका वित्तीय बोझ ग्राहकों पर डाला जाएगा। महंगाई से पहले ही जूझ रहे निवासियों ने अचानक हुई कीमत वृद्धि पर हैरानी जताई है और आगामी त्योहारी सीजन से पहले चीनी की दरों को नियंत्रित करने के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।