भागलपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार बस और बाइक की टक्कर में तीन युवकों की मौत

MyBhagalpur Team6 September 20262 min read38 viewsSad/Bad
भागलपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, तेज रफ्तार बस और बाइक की टक्कर में तीन युवकों की मौत

भागलपुर जिले में एक बहुत ही दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है। तेज रफ्तार बस और मोटरसाइकिल की आमने-सामने की टक्कर में तीन युवकों की मौत हो गई है। यह दुर्घटना शनिवार देर शाम बाईपास थाना क्षेत्र के कजराली रोड के पास हुई। अधिकारियों ने रविवार को इस बात की पुष्टि की है। इस घटना से मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है।

  • भागलपुर के बाईपास थाना क्षेत्र में हुआ भीषण सड़क हादसा
  • तेज रफ्तार बस और नई बाइक की आमने-सामने हुई टक्कर
  • हासे में तीन युवकों की हुई मौत, एक की मौके पर और दो की इलाज के दौरान गई जान
  • पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है

हादसे के शिकार युवकों की पहचान

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इस भीषण सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले तीनों युवकों की पहचान हो गई है। मृतकों की उम्र बहुत कम थी। इनमें 18 साल का अंशु कुमार, 17 साल का सावन कुमार और 18 साल का आशुतोष कुमार शामिल हैं। बाईपास थाना प्रभारी विकास कुमार के अनुसार, ये तीनों लड़के एक नई मोटरसाइकिल पर सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान भागलपुर से बांका जा रही एक बस के साथ उनकी सीधी टक्कर हो गई।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने तीनों शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल मोटरसाइकिल और बस दोनों को जब्त कर लिया है। हालांकि हादसे के बाद बस का ड्राइवर मौके से फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस इस पूरे मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है।

बिहार में सड़क हादसों के आंकड़े

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में सड़क हादसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले सात वर्षों में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के कारण 50 हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई है और करीब 44 हजार लोग घायल हुए हैं। बिहार राज्य में सड़क सुरक्षा एक बहुत बड़ी सामाजिक चुनौती बनकर सामने आई है।

बिहार विधान परिषद में एक मंत्री द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पूरे राज्य में 1,044 ऐसे 'ब्लैक स्पॉट' यानी दुर्घटना संभावित इलाके पहचाने गए हैं। हालांकि एनसीआरबी के रिकॉर्ड में ऐसे 174 स्थान दर्ज हैं। इन आंकड़ों में अंतर की मुख्य वजह अलग-अलग एजेंसियों द्वारा डेटा रिपोर्ट किया जाना है।

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