राजभवन ने तिलकामांछी भागलपुर यूनिवर्सिटी (टीएमबीयू) को 17 लंबित शिकायतों और प्रशासनिक समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई करने और पूरी रिपोर्ट भेजने का आधिकारिक निर्देश दिया है। यह निर्देश 11 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है, जिसमें यूनिवर्सिटी प्रशासन से संस्थान को प्रभावित करने वाली विभिन्न शिकायतों पर की गई कार्रवाई का पूरा विवरण मांगा गया है।
- राजभवन ने टीएमबीयू से 17 लंबित शिकायतों पर रिपोर्ट मांगी है।
- यह निर्देश 11 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया है।
- इसमें प्रोफेसरों को इंचार्ज पद से हटाने और मारपीट की घटनाएं शामिल हैं।
राजभवन के निर्देश में जिन 17 खास मामलों की समीक्षा की जा रही है, उनमें प्रोफेसरों को उनके इंचार्ज पदों से मुक्त करने की प्रक्रिया, छात्रों के साथ कथित मारपीट और अभद्र भाषा के प्रयोग की घटनाएं, और वरिष्ठता के आधार पर विभाग अध्यक्षों की नियुक्ति के नियम शामिल हैं। इसके अलावा, प्रशासनिक चिंताओं जैसे सेवा विस्तार, मानदेय भुगतान की प्रक्रिया, और यूनिवर्सिटी के आवास खाली कराने के आदेश पर रोक लगाने के अनुरोध भी इसमें शामिल हैं।
यह निर्देश टीएमबीयू में प्रशासनिक हलचल के बीच आया है। 1 अक्टूबर 2026 को यूनिवर्सिटी ने 58 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया, जिससे 6 दिसंबर 2025 का पिछला आदेश रद्द हो गया। अगस्त 2026 में बिहार सरकार द्वारा यूनिवर्सिटी एक्ट में बदलाव के विरोध में कर्मचारियों ने प्रदर्शन भी किए थे। इसके अलावा, एमबीए विभाग के कर्मचारियों ने भारी आर्थिक तंगी की शिकायत की है, जिसमें कुछ कर्मचारियों का कहना है कि अगस्त 2025 से लेकर अब तक 10 महीनों से उनका वेतन नहीं मिला है।
जून 2026 में कार्यवाहक कुलपति ने निर्देश दिया था कि ट्रांसफर, पेंशन और वेतन विवाद से जुड़ी सभी शिकायतें यूनिवर्सिटी के ऑनलाइन 'समर्थ पोर्टल' के माध्यम से ही दी जाएं, और कर्मचारियों से कहा गया था कि वे आंतरिक चैनलों को छोड़कर सीधे राजभवन से संपर्क करने से बचें। हालांकि, वर्तमान निर्देश इस बात की पुष्टि करता है कि ये 17 विशिष्ट शिकायतें अभी भी बाहरी निगरानी का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं।