टीका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की स्थापना शाखा अधिकारी को हटाए जाने के बाद 1 सितंबर 2026 से एक हफ्ते तक सील रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन के सख्त नियंत्रण में इस दफ्तर का एक्सेस है और खास फाइलें चाहिए होने पर ही आधिकारिक निगरानी में इसे खोला जाता है और फिर तुरंत दोबारा सील कर दिया जाता है।
यह प्रशासनिक कार्रवाई 25 अगस्त 2026 को शाखा अधिकारी सरवानंद प्रसाद को हटाए जाने के बाद की गई है। यह बर्खास्तगी कुलपति प्रोफेसर विमलेन्दु शेखर झा के आदेश पर और कुलसचिव डॉ. रामाशिश पूर्वे द्वारा जारी अधिसूचना के जरिए लागू की गई थी। अधिकारियों का आरोप है कि प्रसाद ने नौ सदस्यीय जांच समिति को दिए गए निर्देशों में फेरबदल किया था। उन्हें हटाने के साथ ही उनका वेतन भी रोक दिया गया है।
वेतन से जुड़ी गड़बड़ियों और ज्यादा भुगतान के मामलों की जांच के लिए 27 अगस्त 2026 को औपचारिक रूप से नौ सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई थी। इस समिति को 365 कर्मचारियों की फाइलों का ऑडिट करने का काम सौंपा गया है। यह जांच खास तौर पर 20 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त या सेवा दे रहे उन निचले स्तर के लिपिकीय कर्मचारियों की पहचान करने पर केंद्रित है, जिनके वेतन पर 6 जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर पड़ता है। इस जांच का मकसद ऐसे कर्मियों की पहचान करना है जिन्हें तय वेतन ढांचे से ज्यादा मुआवजा मिल रहा था।