TMBU में गलत तरीके से हुई संविदा नियुक्तियों पर मचा भारी विवाद

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में पुस्तकालय और सूचना विज्ञान विभाग में चार संविदा नियुक्तियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर नियम ताक पर रखने और अवैध नियुक्तियों को नियमित करने के लिए राजभवन से अनुमति मांगने का आरोप लगा है।
- विभाग में चार संविदा नियुक्तियां की गईं
- बिना सिंडिकेट या राजभवन की मंजूरी के कुलपति स्तर पर निर्णय लिया गया
- एमएलसी और सिंडिकेट सदस्य डॉ. संजीव सिंह ने इसका कड़ा विरोध किया
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. रामाशिश पूर्वे ने संस्वीकृति की प्रत्याशा में राजभवन को पत्र लिखा है। रिपोर्ट से पता चलता है कि भर्ती प्रक्रिया में कोई सार्वजनिक विज्ञापन या औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया गया था। इसके अलावा, सहायक पद के लिए केवल एक आवेदन और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी पद के लिए एक आवेदन प्राप्त हुआ। इससे यह आरोप लगे कि यह प्रक्रिया विश्वविद्यालय के प्रभावशाली कर्मचारियों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई थी। किसी भी आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया और न ही कोई पारदर्शी चयन समिति बनाई गई।
प्रशासन की रणनीति में बदलाव और छात्रों का विरोध
कानूनी परिणामों का सामना करते हुए, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर आधिकारिक रिकॉर्ड से 'संविदा नियुक्ति' शब्द हटा दिया है। इसकी बजाय यह दावा किया गया कि ये लोग बिना पारिश्रमिक के स्वेच्छा से काम कर रहे थे। प्रशासन अब शिक्षकों के लिए प्रति-कक्षा के आधार पर भुगतान संरचना का प्रस्ताव कर रहा है, जिसमें 20,000 रुपये की मासिक सीमा है। सहायक कर्मचारियों को श्रम न्यायालय द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी के आधार पर भुगतान किया जाना है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और छात्र राजद सहित छात्र संगठनों ने इन पिछले दरवाजे से हुई नियुक्तियों पर भारी आक्रोश व्यक्त किया है। छात्र नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने और मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।