भागलपुर में तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पेंशनरों की परेशानी दुर्गा पूजा जैसे महत्वपूर्ण त्योहार में भी दूर नहीं हो सकी है। पेंशन भुगतान में हुई अत्यधिक देरी के कारण अधिकांश पेंशनरों की दुर्गा पूजा उदासी और आर्थिक तंगी में बीतने की आशंका गहरा गई है। इस गंभीर मामले को लेकर टीएमबीयू पेंशनर संघर्ष मंच ने गहरी नाराजगी जताई है और राज्य सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की मांग की है।
मंच के संयोजक प्रो. पवन कुमार सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के वित्त विभाग की ओर से टीएमबीयू को अगस्त और सितंबर महीने की पेंशन राशि विमुक्त नहीं की गई थी। त्योहार की महत्ता को देखते हुए बाद में शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने आंतरिक स्रोतों से पेंशन भुगतान करने का निर्देश दिया।
यह पत्र मिलने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने बेहद अंतिम समय में भुगतान की कागजी प्रक्रिया शुरू की। शुक्रवार को अंतिम कार्य दिवस होने के कारण देर शाम जैसे-तैसे भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा सकी।
प्रो. सिंह के अनुसार सीएफएमएस में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने फैमिली पेंशनरों और कर्मचारी पेंशनरों के भुगतान के लिए ट्रेजरी को राशि भेज दी, जबकि शिक्षक पेंशनरों के भुगतान के लिए विश्वविद्यालय ने इंडियन बैंक को चेक जारी किया। शनिवार को बैंक खुला रहने के कारण शिक्षक पेंशनरों को अगस्त और सितंबर महीने की पेंशन मिल गई,
लेकिन ट्रेजरी बंद रहने की वजह से फैमिली पेंशनर और कर्मचारी पेंशनर भुगतान पाने से पूरी तरह वंचित रह गए। इस भेदभावपूर्ण स्थिति के कारण त्योहार के समय सैकड़ों बुजुर्गों को भारी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मंच के संयोजक ने चिंता जताई है कि अक्टूबर महीने का पेंशन अनुदान भी सरकार द्वारा फिर से रोक दिया गया है। ऐसे में पेंशन भुगतान का यह संकट आगे भी लगातार बने रहने की आशंका है। टीएमबीयू पेंशनर संघर्ष मंच ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ हो रहे इस असंवेदनशील व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है।
मंच ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से आग्रह किया है कि बुजुर्गों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए पेंशन भुगतान की व्यवस्था को स्थाई रूप से नियमित किया जाए। प्रो. पवन कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए सभी वरिष्ठ नागरिक माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।