भागलपुर के तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग परिसर में शुक्रवार को 'पेंशन सत्याग्रह' का आयोजन किया गया। इस आंदोलन से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- विश्वविद्यालय के करीब 2,669 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और शिक्षकों की लंबित पेंशन व अन्य सेवांत लाभों के भुगतान की मांग।
- पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक पवन कुमार सिंह ने बुजुर्ग पेंशनरों की पीड़ा को उठाया।
- विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग के बीच आपसी सामंजस्य की कमी का आरोप।
महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष शांतिपूर्ण और सत्याग्रही तरीके से बैठकर विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार के रवैये के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया गया।
सत्याग्रह के दौरान वरिष्ठ नागरिक पेंशनरों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा अनुदान जारी किए जाने और समय-समय पर आवंटन मिलने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन उनके भुगतान में जानबूझकर देरी कर रहा है। वक्ताओं ने कहा कि कई महीनों की पेंशन और एरियर राशि अटकी होने के कारण बुजुर्गों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
वेतन सत्यापन कोषांग की पे-स्लिप न मिलने के नाम पर सेवांत लाभों में की जा रही कटौती और सामर्थ पोर्टल की तकनीकी अड़चनों को लेकर भी गहरा रोष प्रकट किया गया। आंदोलनकारियों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
इस अवसर पर उपस्थित पेंशनरों ने कुलसचिव प्रो. रमाशिश पूर्वे और वित्त पदाधिकारी के समक्ष अपनी चिंताएं रखीं।
सत्याग्रह के समापन पर आंदोलनकारियों के एक शिष्टमंडल ने कुलपति कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों से संबंधित एक विस्तृत स्मार-पत्र सौंपा। पवन कुमार सिंह ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो इस सत्याग्रह को उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन धरने में बदल दिया जाएगा।