टीएमबीयू में 106 कर्मचारियों के सेवा विस्तार पर बवाल, लोक भवन ने शुरू की जांच

तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी में 106 कर्मचारियों के सेवा विस्तार में नियमों के उल्लंघन का आरोप, लोक भवन ने मांगी रिपोर्ट।

Puja Singh8 November 20262 min read0 viewsCity Local
टीएमबीयू में 106 कर्मचारियों के सेवा विस्तार पर बवाल, लोक भवन ने शुरू की जांच

तिलका मांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी (TMBU) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला 106 संविदा कर्मचारियों के सेवा विस्तार (Service Extension) में हुई कथित अनियमितताओं का है। इस पूरे मामले की शिकायत अब लोक भवन पहुंच गई है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

यह पूरा विवाद मुरारी मिलन अरुण नामक एक संविदा कर्मचारी की शिकायत से शुरू हुआ है। मुरारी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी में सेवा विस्तार की प्रक्रिया में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं। उनका दावा है कि जिन कर्मचारियों को विस्तार दिया गया है, उनमें से कई की नियुक्ति के समय न तो कोई विज्ञापन निकाला गया था और न ही आरक्षण रोस्टर का पालन किया गया।

आरक्षण नियमों की अनदेखी और भेदभाव का आरोप

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मुरारी मिलन अरुण ने अपनी शिकायत में कहा कि उनकी खुद की नियुक्ति सभी निर्धारित मानकों के अनुसार हुई थी, लेकिन पूर्व कुलपति के कार्यकाल के दौरान एक आंतरिक विवाद के कारण उन्हें हटा दिया गया। उस समय यूनिवर्सिटी ने पद खाली न होने का तर्क दिया था। दिलचस्प बात यह है कि एक यूनिवर्सिटी कमेटी की जांच रिपोर्ट में भी मुरारी के दावों का समर्थन किया गया था।

शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि लोक भवन ने इस मामले में यूनिवर्सिटी से तीन बार दस्तावेज मांगे हैं, लेकिन प्रशासन अब तक उन्हें उपलब्ध कराने में विफल रहा है। इस पूरे मामले पर जब यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफेसर रामाशीष पुरवे से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो वह प्रतिक्रिया देने के लिए उपलब्ध नहीं थे।

गौरतलब है कि बिहार में नियुक्तियों के लिए 100 अंकों का रोस्टर सिस्टम लागू है। हालांकि राज्य सरकार ने 2023 में आरक्षण की सीमा बढ़ाई थी, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने जून 2024 में इस संशोधन को रद्द कर दिया। फिलहाल 60% आरक्षण (50% सामाजिक और 10% EWS) वाला पुराना सिस्टम ही प्रभावी है, जिसमें EBC के लिए 18%, BC के लिए 12%, SC के लिए 16%, ST के लिए 1% और WBC के लिए 3% का प्रावधान है। अब देखना यह है कि लोक भवन की जांच में यूनिवर्सिटी की जवाबदेही कैसे तय होती है।

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