भागलपुर में आदिवासी समाज ने पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया कर्मा-धर्म त्योहार

भागलपुर के चनन के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले आदिवासी समुदायों ने हाल ही में कर्मा-धर्म त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया। इस त्योहार में भाई-बहन के रिश्ते और प्रकृति तथा खेती से गहरे जुड़ाव को दिखाया जाता है।
- गोवर्धा, जगुआजोर, महाजनमा और कछुआ के पहाड़ी इलाकों में मनाया गया त्योहार।
- शनिवार की रात को आदिवासी पुरुषों और महिलाओं ने पारंपरिक कपड़ों में लोक नृत्य किए।
- करम पेड़ की डाली को अखाड़ा नामक धार्मिक स्थल पर स्थापित करके पूजा की गई।
- युवा पीढ़ी को अपनी विरासत और संस्कृति से जोड़ने का एक बड़ा माध्यम है यह पर्व।
अखाड़े में होती है करम की डाली की पूजा
आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार, अखाड़े नामक धार्मिक स्थल पर करम के पेड़ की एक डाली को विधि-विधान से लगाया जाता है और पारंपरिक तौर-तरीकों से उसकी पूजा की जाती है। आदिवासी महिलाओं ने बताया कि इन रस्मों में करम की डाली की पूजा की जाती है और पूरी रात मिलकर नाच-गाना किया जाता है।
प्रकृति और संस्कृति से जुड़ाव का प्रतीक
समुदाय के बुजुर्गों ने बताया कि करम त्योहार आदिवासी समाज, प्रकृति और पर्यावरण के गहरे रिश्ते को उजागर करता है। ये उत्सव नई पीढ़ी को उनकी विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं और पूर्वजों की थाती से जोड़ने का एक बहुत जरूरी जरिया हैं।
मांदर और नगाड़ों की थाप पर पूरी रात नाचीं महिलाएं
पारंपरिक कपड़ों में सजी महिलाओं और युवा लड़कियों ने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मांदर, नगाड़ों और झांझ की थाप पर पूरी रात नृत्य किया। यह त्योहार धान की रोपाई के बाद और फसलों के पकने से पहले मनाया जाता है। यह समय मेहनत के कामों से आराम पाने और प्रकृति के प्रति आभार जताने का होता है।