भागलपुर के पीरपैंती में 23 सितंबर 2026 को एक खास टास्क फोर्स ने अलग-अलग दुकानों और संस्थानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान दो बाल मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया गया।
- श्रम प्रवर्तन अधिकारी ब्रजमोहन तांती ने इस अभियान का नेतृत्व किया।
- इस टीम में कई प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
- यह कार्रवाई इलाके में अवैध बाल श्रम के खिलाफ लगातार चल रहे एक्शन का हिस्सा है।
भारत के कानून यानी बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 (2016 में संशोधित) के तहत, 14 साल से कम उम्र के बच्चों को सभी प्रकार के कामों में रखना पूरी तरह बैन है। इसमें केवल गैर-खतरनाक परिवार आधारित काम के लिए कुछ छूट दी गई है। 14 से 18 साल के बीच के किशोरों को खनन या विस्फोटक और ज्वलनशील पदार्थों वाले खतरनाक कामों में लगाना कानूनी रूप से मना है।
14 साल से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना एक आपराधिक अपराध है। ऐसा करने वालों पर कड़ी सजा का प्रावधान है, जिसमें दो साल तक की जेल हो सकती है क्योंकि सरकार राष्ट्रीय श्रम नियमों का पालन कराने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।