जमुई के लक्ष्मीपुर में वैष्‍णवी दुर्गा मंदिर मना रहा है आस्था और परंपरा के 50 साल

MyBhagalpur Team15 October 20262 min read0 viewsCity Local
जमुई के लक्ष्मीपुर में वैष्‍णवी दुर्गा मंदिर मना रहा है आस्था और परंपरा के 50 साल

जमुई के लक्ष्मीपुर स्थित वैष्‍णवी दुर्गा मंदिर में मूर्ति स्थापना और पूजा-अर्चना का यह 50वां साल है। पिछले 50 वर्षों से यह मंदिर क्षेत्र में आस्था और आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बना हुआ है। कलश स्थापना के दिन से ही दूर-दूर से भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में इकट्ठा होते हैं और शाम की आरती यहां का एक खास आकर्षण होती है। शाम की पूजा से पहले महिला श्रद्धालु दीपक जलाकर प्रार्थना करती हैं। इस दुर्गा पूजा की शुरुआत स्वर्गीय बाबूलाल साह और सोनिया देवी ने की थी, जिन्होंने मंदिर के लिए जमीन दान दी थी। इस आयोजन का प्रबंधन वर्तमान में एक समर्पित पूजा समिति द्वारा किया जाता है। सप्तमी से लेकर प्रतिमा विसर्जन तक एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें रात भर मनोरंजन और खेल चलते रहते हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के अलावा पूजा समिति के अधिकृत स्वयंसेवक भी सक्रिय रहते हैं। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने और परिसर की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लक्ष्मीपुर बाजार से मंदिर परिसर तक के रास्ते को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है, जिससे शाम ढलते ही पूरा इलाका जगमगा उठता है।

पुलिस थाना से है खास धार्मिक जुड़ाव

वैष्‍णवी दुर्गा मंदिर का स्थानीय लक्ष्मीपुर थाने के साथ गहरा धार्मिक रिश्ता है। माता के 'बेलभरानी' अनुष्ठान का निमंत्रण पुलिस थाना परिसर के अंदर स्थित एक बेल के पेड़ को दिया जाता है। इसके अलावा, परंपरा के अनुसार विसर्जन समारोह के दौरान पहली 'खोइछा' स्थानीय थाने के एक पुलिस अधिकारी की पत्नी द्वारा अर्पित की जाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि वैष्‍णवी मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। इसी आस्था के परिणाम स्वरूप, मूर्ति स्थापना से पहले माता को चांदी के मुकुट और सोने के गहनों से सजाया जाता है, जिन्हें श्रद्धालुओं द्वारा दान किया गया है।

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