विक्रमशिला सेतु के जहाजों से गंगा में कचरा, डॉल्फिन और पक्षियों पर बड़ा खतरा

MyBhagalpur Team20 October 20262 min read0 viewsCity Local
विक्रमशिला सेतु के जहाजों से गंगा में कचरा, डॉल्फिन और पक्षियों पर बड़ा खतरा

भागलपुर, 20 अक्टूबर। विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण कार्य के कारण आम जनता को राहत देने के लिए शुरू किया गया जलयान परिचालन अब गंगा के पर्यावरण के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। सुगम सफर के उत्साह में यात्री अपनी नागरिक जिम्मेदारियों को भूलकर पवित्र नदी को डस्टबिन बना रहे हैं। जहाजों से सीधे गंगा में फेंकी जा रही प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट और अन्य कचरा इस पूरे इकोसिस्टम को तबाह कर रहा है। यह संकट इसलिए और भी भयानक है क्योंकि यह पूरा क्षेत्र विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य के अंतर्गत आता है। वर्तमान में यहाँ देश-विदेश से प्रवासी पक्षियों का आगमन भी शुरू हो चुका है। ऐसे में इंसानी लापरवाही इन बेजुबान और विलुप्तप्राय जीवों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। उल्लेखीय है कि भागलपुर का यह गंगा क्षेत्र भारत के राष्ट्रीय जलीय जीव, गांगेय डॉल्फिन का सुरक्षित गढ़ माना जाता है। इसके साथ ही सर्दियों की शुरुआत होते ही यहाँ मध्य एशिया और साइबेरिया से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर प्रवासी पक्षी पहुँचने लगे हैं।

विशेषज्ञ की चेतावनी

प्रख्यात पर्यावरणविद् सह पक्षी विशेषज्ञ दीपक कुमार उर्फ झुन्नू ने चेतावनी देते हुए कहा, गंगा में फेंका जा रहा कचरा केवल सामान्य गंदगी नहीं है, बल्कि यह इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक सीधा जैविक खतरा बन चुका है। गांगेय डॉल्फिन और मछलियां पानी में तैरते प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक को अनजाने में निगल रही हैं, जिससे उनके पेट और श्वसन तंत्र ब्लॉक हो रहे हैं और उनकी मौत हो रही है। नदी के किनारे और टापुओं पर जमा हो रहा प्लास्टिक कचरा मेहमान पक्षियों के भोजन चक्र को बिगाड़ रहा है। प्रदूषित पानी के कारण उनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। नदी का पारिस्थितिकी तंत्र नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक नदी के तल में बैठकर पानी की प्राकृतिक शुद्धीकरण क्षमता और जलीय वनस्पतियों को खत्म कर रहा है।

पर्यावरणविद् की मांग

पर्यावरणविद् दीपक कुमार ने जिला प्रशासन और जलयान ऑपरेटरों से इस दिशा में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी संचालित स्टीमर और जहाजों पर पर्याप्त संख्या में बड़े कूड़ेदान रखे जाएं, ताकि यात्रियों को कचरा फेंकने के लिए जगह मिले। यात्रा के दौरान जहाजों पर लगातार लाउडस्पीकर, पोस्टरों और उद्घोषणाओं के जरिए यात्रियों को सचेत किया जाए। नियमों का उल्लंघन करने और नदी में कचरा फेंकने वालों पर ऑन-द-स्पॉट भारी जुर्माने का प्रावधान लागू हो। दीपक कुमार उर्फ झुन्नू ने आम जनता से भी एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार या प्रशासन अकेले गंगा को साफ नहीं रख सकते जब तक नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे। उन्होंने संदेश दिया कि याद रखिए, गंगा पार करना हमारी जरूरत है, लेकिन गंगा को स्वच्छ रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। अपनी सहूलियत के बदले में राष्ट्रीय धरोहर डॉल्फिन और हमारे मेहमान पक्षियों की जान दांव पर मत लगाइए। यदि प्रशासन और आम जनता ने समय रहते इस बढ़ते प्रदूषण पर लगाम नहीं लगाई, तो भागलपुर की पहचान माने जाने वाले ये विलुप्तप्राय जलीय जीव और खूबसूरत प्रवासी पक्षी हमेशा के लिए इस क्षेत्र से मुंह मोड़ लेंगे।

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