भागलपुर का विक्रमशिला सेतु 1 अक्टूबर से तीन महीने के लिए बंद, जानिए पूरी खबर

अंग क्षेत्र को उत्तर बिहार और सीमांचल से जोड़ने वाली मुख्य जीवनरेखा, विक्रमशिला सेतु, मरम्मत कार्य और स्थायी ट्रस ब्रिज के निर्माण के लिए 1 अक्टूबर से तीन महीने की अवधि के लिए यातायात के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। सेतु के बंद होने से गंगा नदी ही एकमात्र परिवहन विकल्प रह गई है, जो भागलपुर जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी रसद चुनौती पेश कर रही है।
हजारों यात्रियों और वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए, प्रशासन कोलकाता और अन्य क्षेत्रों से बड़े मालवाहक जहाज मंगा रहा है। इन जहाजों का उद्देश्य एम्बुलेंस, ट्रकों और आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले वाहनों को लगभग 15 से 20 मिनट में नदी के पार ले जाना है। अधिकारी आगामी त्योहारों के मौसम के दौरान संभावित अराजकता से बचने के लिए पिछले परिचालन रिकॉर्ड की समीक्षा करके और पिछली कमियों को दूर करके युद्धस्तर पर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) स्थापित करने पर काम कर रहे हैं।
जेटी निर्माण और प्रशासनिक तैयारियां
प्रशासन का एक प्रमुख ध्यान सुरक्षित जहाज डॉकिंग सुनिश्चित करने के लिए भागलपुर में बरारी घाट और नौगछिया में महादेवपुर घाट पर मजबूत जेटी का निर्माण करना है। यह पहल मई में देखी गई कुप्रबंधन के बाद आई है, जब एक स्लैब गिरने से यातायात में व्यवधान उत्पन्न हुआ था और यात्रियों को कीचड़ और उचित एप्रोच रोड की कमी से जूझना पड़ा था। बीयाडा की दीवारों को गिराने को लेकर हुए विवादों सहित पिछली घटनाओं ने इस बार एक सख्त प्रशासनिक दृष्टिकोण को प्रेरित किया है।
सुरक्षा और नियम
संचालन एजेंसियों ने दोनों नदी तटों पर स्थिर जेटी, सुलभ एप्रोच रोड और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। इस बंदी के दौरान दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ का त्योहार आने के कारण, प्रशासन बढ़ी हुई यात्री भीड़ को प्रबंधित करने के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है।
आपदा प्रबंधन के अपर जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) कुंदन कुमार के अनुसार, सभी जहाजों के लिए लाइफ जैकेट और लाइफबॉय से लैस होना अनिवार्य है। निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों या वाहनों को ले जाने वाले चालकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, प्रशासन ने नदी तटों पर अवैध वसूली को रोकने के लिए कड़े उपाय करने का संकल्प लिया है।