विक्रमशिला सेतु की बढ़ेगी उम्र: कार्बन प्लेटिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग से 30 साल और चलेगा पुल
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु को कार्बन प्लेटिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग से 30 साल तक के लिए सुरक्षित बनाया जा रहा है। जानें पूरी प्रक्रिया।

भागलपुर का लाइफलाइन माना जाने वाला विक्रमशिला सेतु मरम्मत के जरिए अब एक नई जिंदगी पाने जा रहा है। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर इस पुल की परिचालन अवधि को करीब 25 से 30 साल तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। पुल के आंतरिक रेट्रोफिटिंग का काम पूरा होने के बाद अब इसके ऊपरी हिस्से पर कार्बन प्लेटिंग, कार्बन फाइबर और कार्बन लेमिनेट्स लगाए जा रहे हैं, जिससे इसकी मजबूती और भार सहने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
डिजिटल निगरानी और आधुनिक तकनीक का संगम
पुल की सुरक्षा और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन एक हाई-टेक 'ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम' भी स्थापित कर रहा है। यह सिस्टम इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), सेंसर और डेटा एनालिटिक्स पर आधारित होगा, जो पुल में होने वाले कंपन, झुकाव और संरचनात्मक तनाव की रियल-टाइम डिजिटल निगरानी करेगा। इससे भविष्य में रखरखाव और निरीक्षण का काम बेहद सटीक और आसान हो जाएगा।
निर्माण कार्य की प्रगति की बात करें तो, पुल के चार सबसे प्रभावित हिस्सों में से एक में स्टील गर्डर सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिए गए हैं। बाकी हिस्सों में कंक्रीट बीम को काटकर नए बेयरिंग लगाने और गर्डर लॉन्च करने का काम जारी है। साथ ही, पुल के कुल वजन को कम करने के लिए भारी RCC फुटपाथ और रेलिंग को हटाकर उनके स्थान पर हल्के स्टील स्ट्रक्चर लगाए जा रहे हैं।
इस पूरे प्रोजेक्ट को एसपी सिंगला एजेंसी द्वारा अंजाम दिया जा रहा है, जिसमें मुंबई की एक विशेषज्ञ टीम काम कर रही है और आईआईटी पटना इसकी तकनीकी निगरानी कर रहा है। कंक्रीट की क्यूरिंग अवधि को देखते हुए अधिकारियों का अनुमान है कि यह पुल जनवरी के मध्य तक पूरी तरह से चालू हो जाएगा, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सफर मिलेगा।