भागलपुर में विक्रमशिला सेतु बंद, जानिए यात्रियों के लिए क्या हैं नई व्यवस्थाएं

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु को 1 अक्टूबर 2026 से 90 दिनों के लिए सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यह फैसला अस्थायी बेली ब्रिज की जगह स्थायी स्टील ट्रस ब्रिज बनाने के लिए लिया गया है। यह बंदी 30 सितंबर 2026 की रात 12 बजे से शुरू हुई है और 30 नवंबर 2026 तक पूरी होनी है। इस मरम्मत का काम एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन द्वारा बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) के साथ मिलकर किया जा रहा है, जिसकी निगरानी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (खगड़िया प्रमंडल) कर रही है।
नाव और फेरी सेवा की शुरुआत
यात्रा में होने वाली परेशानी को कम करने के लिए 1 अक्टूबर 2026 से बियाडा घाट और जान्हवी चौक घाट के बीच फेरी सेवा शुरू कर दी गई है। यह सेवा रोजाना शाम 5:30 बजे तक ही चलती है, जिसके बाद किसी को भी नई एंट्री नहीं मिलती है। कन्हैया लॉजिस्टिक्स, सर्क शिपिंग और जिरिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी अधिकृत कंपनियां इस परिवहन को संभाल रही हैं। पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों के लिए यह यात्रा मुफ्त है, और एम्बुलेंस सेवाएं भी बिना किसी शुल्क के दी जा रही हैं। वहीं, मोटर चालित वाहनों के लिए बाइक का किराया 50 रुपये और कारों का किराया 700 रुपये तय किया गया है। सुरक्षा कारणों से सामान्य देशी नावों के इस्तेमाल पर पूरी पाबंदी लगा दी गई है।
यात्रियों की संख्या और गंगा का जलस्तर
परिवर्तन के दूसरे दिन यानी 2 अक्टूबर 2026 को अधिकारियों ने बताया कि आठ बड़े जहाजों द्वारा लगभग 20 फेरों में 20,000 से अधिक यात्रियों ने फेरी सेवा का उपयोग किया। पिछले 24 घंटों में गंगा के जलस्तर में 10 इंच की वृद्धि होने और फेरी पॉइंट पर कीचड़ व जलभराव के कारण संचालन में कुछ परेशानियां आईं। जान्हवी चौक से बियाडा घाट की तरफ नीचे की यात्रा में 55 से 60 मिनट लगते हैं, जबकि बियाडा से जान्हवी चौक की तरफ ऊपर की यात्रा में औसतन 1.5 से 2 घंटे का समय लगता है, हालांकि स्पीड वोटों ने वापसी के समय को घटाकर 15 मिनट कर दिया है।
सुरक्षा और अन्य सुविधाएं
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पुलिस, मजिस्ट्रेट और मेडिकल स्टाफ के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी तैनात किया गया है। बियाडा घाट पर दो जहाजों के इंजन फेल होने की खबर भी सामने आई थी, जिसके बाद प्रशासन ने पुष्टि की है कि अब वहां चौबीसों घंटे यानी 24/7 मैकेनिकल सपोर्ट उपलब्ध है। इसके अलावा, यात्रा का इंतजार कर रहे यात्रियों को खाना उपलब्ध कराने के लिए 'जीविका दीदी की रसोई' के स्टॉल भी लगाए गए हैं।