भालपुर: बरारी थाना हिरासत में पश्चिम बंगाल के व्यक्ति की संदिग्ध मौत, मचा हड़कंप

भागलपुर के बरारी थाना में हिरासत के दौरान पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- मृतक की पहचान पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी (अलीपुरदुआर) निवासी 50 वर्षीय महेंद्र मंडल के रूप में हुई है।
- घटना 19 अगस्त 2026 की है।
- मृतक को डायल 112 टीम ने विक्रमशिला सेतु से बरामद कर थाने लाया था।
- थाने के CCTNS रूम में व्यक्ति का शव बिजली के तार से लटका मिला।
लापरवाही और नियमों की अनदेखी का आरोप
महेंद्र मंडल को निर्धारित लॉक-अप के बजाय CCTNS रूम में रखा गया था, जिसे अब लापरवाही और मामले को दबाने की कोशिश माना जा रहा है। आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में मौत के बाद जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।
नियमों का उल्लंघन और कानूनी सवाल
बताया जा रहा है कि पुलिस ने जिला मजिस्ट्रेट (DM) या राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को सूचित किए बिना और अनिवार्य मजिस्ट्रेट जांच शुरू किए बिना ही पोस्टमॉर्टम कराकर अननेचुरल डेथ (UD) केस दर्ज कर लिया। यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और 1993 के NHRC प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है, जिसके तहत हिरासत में मौत की सूचना 24 घंटे के भीतर देनी होती है और स्वतंत्र न्यायिक जांच जरूरी होती है।
कड़ी जवाबदेही और सुप्रीम कोर्ट का रुख
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हिरासत में मौत होने पर राज्य की जवाबदेही तय होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिसमें जरूरत पड़ने पर मामला CBI को सौंपा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, 13 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ के एक समान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच और 25 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया था और अधिकारियों के व्यवहार की कड़ी आलोचना की थी। बरारी पुलिस द्वारा इन मानकों की अनदेखी से आरोप लग रहे हैं कि विभाग मौत की परिस्थितियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है।