अररिया में शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन गुरुवार को भक्तों ने भगवती के पांचवें रूप स्कंदमाता की पूजा की। जिलाभर के मंदिरों और पूजा पंडालों में भारी भीड़ देखी गई। शांति, समृद्धि और सुख की कामना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी। जैसे-जैसे दुर्गा पूजा नजदीक आ रही है, शहर का माहौल भक्तिमय हो गया है। मंदिरों और पंडालों में धार्मिक भजन बज रहे हैं। सुबह और शाम के समय मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज रहे हैं। कई लोग घर पर उपवास रखकर दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ कर रहे हैं।
पंडित बालकृष्ण झा के अनुसार, जो भक्त नवरात्र के दौरान भगवती की पूजा करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें शुभ फल मिलते हैं। उन्होंने बताया कि देवी स्कंदमाता को मोक्ष का द्वार खोलने वाली और सभी इच्छाएं पूरी करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। स्कंदमाता की पूजा विशेष रूप से संतान प्राप्ति के आशीर्वाद के लिए की जाती है। सौरमंडल की अधिष्ठाता देवी होने के कारण, उनकी पूजा से भक्तों को अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, असुर तातकासुर का वध केवल भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही किया जा सकता था। माता पार्वती ने अपने पुत्र भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने के लिए स्कंदमाता का रूप धारण किया था, जिसके बाद भगवान स्कंद ने तातकासुर का सफलतापूर्वक वध किया था।
जिला मुख्यालय में दुर्गा पूजा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। लगभग एक दर्जन मंदिरों और पंडालों को रंगीन, दूधिया सफेद बल्बों से सजाया जा रहा है। कलाकार मूर्तियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। पूजा समितियों के सदस्य मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाकर और भव्य पंडाल बनाकर इस साल के त्योहार को यादगार बनाने में जुटे हैं।