बिहार सरकार का बड़ा ऐलान, 8000 करोड़ से बनेगा बैद्यनाथ-पशुपतिनाथ कॉरिडोर, नेपाल जाना हुआ आसान

Pooja Kanjani14 February 20262 min read17 viewsBihar
बिहार सरकार का बड़ा ऐलान, 8000 करोड़ से बनेगा बैद्यनाथ-पशुपतिनाथ कॉरिडोर, नेपाल जाना हुआ आसान

बिहार सरकार ने बजट सत्र के दौरान धार्मिक पर्यटन और यातायात को लेकर एक बहुत बड़ी घोषणा की है। अब झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम (Deoghar) और नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर (Kathmandu) को जोड़ने के लिए एक नया ‘ग्रीनफील्ड कॉरिडोर’ बनाया जाएगा। पथ निर्माण मंत्री Dilip Kumar Jaiswal ने विधानसभा में जानकारी दी कि यह 250 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे अगुवानी-सुल्तानगंज पुल के रास्ते गुजरेगा। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 8,000 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

कैसा होगा नया रूट और क्या मिलेगी सुविधा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कॉरिडोर नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर से शुरू होकर बिहार के सुपौल (Bhimnagar) में प्रवेश करेगा। यहां से यह मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया (Pasraha) और अगुवानी घाट होते हुए सुल्तानगंज और बांका तक जाएगा। अंत में यह झारखंड के देवघर में मिलेगा।

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इस नए रास्ते के बनने से श्रद्धालुओं को बहुत राहत मिलेगी। अभी देवघर से काठमांडू जाने में करीब 14 घंटे लगते हैं और दूरी 534 किलोमीटर पड़ती है। नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी घटकर सिर्फ 250 किलोमीटर रह जाएगी, जिससे सफर का समय घटकर महज 2 से 3 घंटे होने की उम्मीद जताई गई है। श्रावणी मेला के दौरान कांवड़ियों की सुविधा के लिए इसमें एक अलग सर्विस रोड भी बनाई जाएगी ताकि पैदल चलने वालों को कोई खतरा न हो।

अगुवानी-सुल्तानगंज पुल पर क्या है अपडेट?

इस कॉरिडोर के लिए गंगा नदी पर बन रहे अगुवानी-सुल्तानगंज पुल का पूरा होना सबसे जरूरी है। पथ निर्माण विभाग के सचिव Pankaj Kumar Pal ने हाल ही में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने निर्माण एजेंसी को साफ कहा है कि अगले 18 महीनों में यानी मई 2027 तक पुल का काम हर हाल में पूरा करना होगा।

अगर तय समय सीमा के अंदर काम खत्म नहीं हुआ, तो ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई है। IIT Roorkee ने पुल के नए डिजाइन और फाउंडेशन को मंजूरी दे दी है। फिलहाल पुराने और खराब हो चुके पिलर कैप्स को हटाने का काम चल रहा है, ताकि नए सिरे से सुरक्षित निर्माण किया जा सके। अप्रोच रोड का काम मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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