बुधवार, 9 सितंबर 2026 को बांका जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेष शिविर लगाए गए। इसमें धुरैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह राष्ट्रव्यापी अभियान हर महीने की 9 तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को व्यापक प्रसवपूर्व देखभाल प्रदान करने के लिए है। इस आयोजन के दौरान बेलहर, एपीएचसी धौरी, खरौंधा, बीजीखोरबा और बसमता सहित कई केंद्रों की मेडिकल टीमों ने लगभग 2,000 गर्भवती महिलाओं की जरूरी जांच की। इन जांचों में वजन, ब्लड प्रेशर और हीमोग्लोबिन के स्तर की जांच शामिल थी।
स्वास्थ्य कर्मियों ने गंभीर एनीमिया से जुड़े 21 हाई-रिस्क मामलों की पहचान की। इन मरीजों को तुरंत इलाज के लिए एम्बुलेंस से भेजा गया, जिसमें फेरिक कार्बोक्सिमलटोज के इंजेक्शन भी शामिल थे।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने महिलाओं को जरूरी सलाह दी। उन्होंने पौष्टिक आहार, नियमित जांच और गर्भावस्था से जुड़े खतरों के बारे में बताया। बिहार स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य जटिलताओं का समय पर पता लगाकर मातृ मृत्यु दर को कम करना है। अप्रैल 2026 तक यह कार्यक्रम राज्य में 77 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं की सेवा कर चुका है।
महिलाओं को सलाह दी गई कि वे किसी भी स्वास्थ्य समस्या या आपात स्थिति के लिए अपने स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों के संपर्क में रहें। इसी तरह के प्रयास खगड़िया में भी किए गए, जहां 200 और मरीजों को इलाज मिला। जून 2026 में अपनी दसवीं वर्षगांठ मनाने वाला यह अभियान 'सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माँ, सशक्त भारत' के मिशन पर काम कर रहा है। इसके तहत हाई-रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं के लिए डिलीवरी के बाद 45 दिनों तक लगातार निगरानी की जाती है।