चौंकाने वाली खबर: बदलते मौसम में फसलों के लिए बड़ा खतरा बने सूत्रकृमी!

भागलपुर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले सूत्रकृमियों की समस्या पर एक दिवसीय ब्रेन स्टार्मिंग सेशन का आयोजन किया गया। इस सत्र में वैज्ञानिकों ने किसानों और छात्रों को जागरूक करने के लिए आधुनिक तकनीकों पर चर्चा की। भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय में फसलों के नुकसान पर हुई चर्चा अनुसंधान निदेशालय एवं कीट विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि और उद्यानिकी फसलों में सूत्रकृमियों के बढ़ते प्रकोप से निपटना था। शोध निदेशक ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के शोध निदेशक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित करके की। उन्होंने मौसम परिवर्तन के कारण बदलती पारिस्थितिकी में सूत्रकृमियों की समस्याओं के प्रति आगाह किया और छात्रों को पौध संरक्षण में स्वरोजगार से जुड़ने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने दी आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह मुख्य वक्ता डॉ. निशि केशरी ने खाद्यान्न और उद्यानिकी फसलों में सूत्रकृमियों से होने वाले आर्थिक नुकसान और उनके समेकित प्रबंधन की तकनीकों को समझाया। निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार ने विश्वव्यापी समस्याओं से चेताते हुए कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। इस सत्र में प्राचार्या डॉ. रूबी रानी, डॉ. किरण कुमारी, डॉ. अनुकरण साहू, डॉ. संजय कुमार शर्मा और डॉ. रामानुज विश्वकर्मा सहित 80 से अधिक लोग शामिल हुए।