भागलपुर जिले में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने के लिए मंगलवार को 90 दिनों का 'एनीमिया मुक्त बिहार' अभियान शुरू किया गया है। इस राज्य-स्तरीय कार्यक्रम का उद्घाटन उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया, जो दो-तरफा संचार प्रणाली के जरिए राज्यभर के 115 अस्पतालों से जुड़े। भागलपुर में सदर अस्पताल के सभागार में जिला पदाधिकारी अलंकृता पांडेय ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
- छह महीने से पांच साल तक के बच्चे
- स्कूली छात्र और 10 से 19 साल की किशोरियां
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
- पुरुष
एनीमिया की पहचान के लिए डिजिटल हीमोग्लोबिन मीटर का इस्तेमाल किया जाएगा, और स्वास्थ्य विभाग बीमारी की गंभीरता के आधार पर मुफ्त दवा और इलाज उपलब्ध कराएगा।
हल्के या मध्यम एनीमिया से पीड़ित मरीजों को आयरन-फॉलिक एसिड (IFA) की गोलियां दी जाएंगी। गंभीर रूप से एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को भागलपुर सदर अस्पताल, नवगछिया अनुमंडल अस्पताल और कहलगांव अनुमंडल अस्पताल में मुफ्त फेरिक कार्बोमाल्टोज (FCM) का इलाज दिया जाएगा। जिला पदाधिकारी अलंकृता पांडेय ने इस बात पर जोर दिया कि स्वस्थ महिलाएं एक स्वस्थ पीढ़ी की नींव हैं और उन्होंने केवल स्वास्थ्य विभाग से परे सामुदायिक स्तर पर शामिल होने की अपील की। उन्होंने अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग, आईसीडीएस, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम के साथ समन्वय करने का आग्रह किया। जिला सामुदायिक समन्वयक भारत कुमार सिंह ने बताया कि आशा और एएनएम कार्यकर्ता संतुलित आहार, नियमित जांच और इलाज के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए घर-घर जा रही हैं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक मणि भूषण झा ने पुष्टि की है कि लाभार्थियों को स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से ट्रैक करने के लिए एक माइक्रो-प्लान तैयार किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि पहचाना गया कोई भी मरीज फॉलो-अप देखभाल से वंचित न रहे। इस पहल का उद्देश्य कम हीमोग्लोबिन स्तर से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से निपटना है, जो बच्चों में शारीरिक सहनशक्ति, किशोरों के समग्र स्वास्थ्य और मातृ कल्याण को प्रभावित कर सकते हैं।