पीएम मोदी के दौरे से पहले गंगा पथ और एयरपोर्ट के लिए प्रशासन ने बढ़ाई तेजी

MyBhagalpur Team23 October 20262 min read0 viewsDevelopment and good news
पीएम मोदी के दौरे से पहले गंगा पथ और एयरपोर्ट के लिए प्रशासन ने बढ़ाई तेजी

भागलपुर जिला प्रशासन ने 22 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे की तैयारी तेज कर दी है। अधिकारियों ने गंगा पथ परियोजना और सुल्तानगंज ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के लिए सोशल इंपैक्ट असेसमेंट यानी एसआईए को प्राथमिकता दी है, जिसमें इसे 45 दिनों के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया गया है। प्रशासन इसी दौरे के दौरान पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट और विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखे जाने की भी तैयारी कर रहा है।

  • 22 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे की तैयारी तेज
  • गंगा पथ और सुल्तानगंज ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के लिए 45 दिनों में एसआईए पूरा करने का निर्देश
  • पीरपैंती थर्मल पावर प्रोजेक्ट और विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने की तैयारी

उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक और नोडल अधिकारी नियुक्त

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 21 अक्टूबर 2026 को हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण और शुरुआती कार्यों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया है। गंगा पथ परियोजना मुंगेर से सबौर को भागलपुर के रास्ते जोड़ने वाला 83 किलोमीटर लंबा चार लेन का कॉरिडोर है, जिसकी अनुमानित लागत 5,327 करोड़ रुपये है। इस परियोजना को जल संसाधन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी मिल चुका है और इसे दो खंडों में बांटा गया है: मुंगेर से सुल्तानगंज (41.931 किमी) और सुल्तानगंज से सबौर (41.258 किमी)। यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के माध्यम से वित्तपोषित होगी, जिसमें 40% सरकारी और 60% निजी निवेश होगा, जिसके लिए 1,294 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता है।

सुल्तानगंज ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट और भूमि अधिग्रहण

अजगैबीनाथ धाम के पास 855 एकड़ जमीन पर विकसित होने वाले प्रस्तावित सुल्तानगंज ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट पर लगभग 3,500 करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की लागत, जिसमें 1,356 एकड़ कृषि भूमि शामिल है, नए न्यूनतम मूल्यांकन दरों यानी एमवीआर लागू होने के बाद बढ़कर 529.53 करोड़ रुपये हो गई है। यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के जरिए विकसित की जानी है, और राइट्स को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने का काम सौंपा गया है। डीपीआर के लिए जिम्मेदार एजेंसी की चयन प्रक्रिया 27 फरवरी तक टेंडर के जरिए पूरी होनी है। प्रशासनिक जोर के बावजूद, स्थानीय किसान भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का विरोध जारी रखे हुए हैं।

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