भागलपुर और बांका में प्राकृतिक खेती से महकेगी कतरनी चावल की खुशबू

MyBhagalpur Team21 August 20262 min read41 viewsDevelopment and good news
भागलपुर और बांका में प्राकृतिक खेती से महकेगी कतरनी चावल की खुशबू

भागलपुर और बांका के अधिकारियों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों के जरिए जीआई-टैग प्राप्त कतरनी चावल की खुशबू और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक पहल शुरू की है।

मुख्य बातें:
- राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत यह परियोजना भागलपुर जिले के तीन ब्लॉकों में लागू की जा रही है।
- चयनित क्षेत्रों में जगदिशपुर में भवानीपुर देशरी ग्राम पंचायत, गोरडीह में तरच्छा दमचक औरसोंदिह-सटजोरी ग्राम पंचायतें और सुलतानगंज में खानपुर ग्राम पंचायत शामिल हैं।
- इस कार्यक्रम के लिए कुल 375 किसानों को चुना गया है, जिसमें प्रत्येक तीन भाग लेने वाले ब्लॉकों से 125 किसानों को चुना गया है।
- प्रत्येक किसान को सख्त रूप से जैविक तरीकों का उपयोग करके एक एकड़ भूमि पर कतरनी चावल की खेती करने का काम सौंपा गया है।

कृषि अधिकारियों के निर्देश


जिला कृषि अधिकारी प्रेमशंकर प्रसाद ने बताया कि इस पहल के तहत रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। किसानों को प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त इनपुट का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है; उदाहरण के लिए, बीज उपचार के लिए गोमूत्र और अन्य प्राकृतिक अर्क का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, गोबर, सड़े हुए पौधे के अवशेष, राख और अन्य कृषि कचरे से तैयार खाद उर्वरक के रूप में काम करेगी, जिससे किसानों को बाहरी इनपुट पर पैसा खर्च करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इन प्रथाओं से मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञ की राय


टीएमबीयू के वनस्पति विज्ञान पीजी विभाग के एक शोध विद्वान राहुल कुमार ने उल्लेख किया कि कतरनी चावल मुख्य रूप से अपनी सुगंधित गुणों से प्रतिष्ठित है। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर दीर्घकालिक निर्भरता मिट्टी की गुणवत्ता को खराब कर सकती है और इसके सुगंधित लक्षणों को प्रभावित करके चावल की प्राकृतिक सुगंध को कम कर सकती है। प्राकृतिक खेती की ओर बदलाव का उद्देश्य इन विशिष्ट विशेषताओं को संरक्षित करना है।

भविष्य की योजनाएं


जिला कृषि अधिकारियों को उम्मीद है कि प्राकृतिक रूप से उगाए गए कतरनी चावल की बेहतर गुणवत्ता और खुशबू किसानों को बेहतर बाजार के अवसर प्रदान करेगी। इस पहल का उद्देश्य उत्पादन लागत को कम करना, रासायनिक इनपुट पर निर्भरता को कम करना और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना है। कृषि विभाग वर्तमान में चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों पर प्रशिक्षण दे रहा है। एक सफल पायलट के बाद, जैविक कतरनी चावल के उत्पादन के दायरे का विस्तार करने की योजना है।

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