भागलपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों खेतों का नजारा पूरी तरह बदल गया है। मानसून की अच्छी कृपा और समय पर हुई रिमझिम बारिश के कारण धान की फसलें अब पकने लगी हैं। हरी-भरी फसलें अब सुनहरी आभा बिखेर रही हैं, जिसे देखकर अन्नदाता बेहद उत्साहित हैं। कृषि विभाग द्वारा तय किए गए लक्ष्य के अनुसार जिले के बड़े हिस्से में धान की रोपाई हुई थी, जो अब पकने की ओर अग्रसर है और इस बार पैदावार पिछले रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद जगा रही है।
- धान की कटाई अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर तक चलेगी।
- कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों से पानी सुखाने की सलाह दी है।
- मानसून के अच्छे साथ से किसानों को कम पटवन करना पड़ा।
धान की कटाई मुख्य रूप से अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होकर नवंबर महीने तक बड़े पैमाने पर चलेगी। शुरुआती और मध्यम अवधि वाली धान की किस्में पूरी तरह पक चुकी हैं, जिनकी कटाई जल्द ही गति पकड़ेगी।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अवस्था में धान की फसल को अब और पानी की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में नमी कम होने दें ताकि दाने सख्त और चमकदार बनें।
कटाई से 10-15 दिन पहले खेत सुखाना अनिवार्य है। यदि खेतों में पानी जमा रहेगा, तो कटाई में देरी होगी और फसल गिरने से दाने सड़ सकते हैं। डॉ. विकास कुमार, वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक का कहना है कि इस वर्ष मानसून ने भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में धान की फसल के लिए संजीवनी का काम किया है। वर्तमान में धान की बालियां पककर भारी हो चुकी हैं। इस समय किसानों को खेतों में पानी रोकने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। कटाई से करीब दो सप्ताह पहले खेतों का पानी निकाल देना चाहिए, जिससे मिट्टी सूखी और सख्त हो जाए। इससे कंबाइन हार्वेस्टर या मजदूरों द्वारा कटाई करने में आसानी होगी और अनाज की गुणवत्ता भी बेहतरीन रहेगी।
किसान राजकुमार पंजियारा का कहना है कि शुरुआत में मौसम को लेकर थोड़ी चिंता थी, लेकिन बाद में मानसून ने बहुत अच्छा साथ दिया। समय पर बारिश होने से हमें महंगे डीजल पंपों से ज्यादा पटवन नहीं करना पड़ा। इस बार प्रति एकड़ धान की बालियां बहुत घनी और लंबी आई हैं। फसल देखकर छाती चौड़ी हो जा रही है। उम्मीद है कि नवंबर की शुरुआत से हम पूरी तेजी से कटाई में जुट जाएंगे और इस बार मुनाफा भी अच्छा मिलेगा।