भागलपुर की विशेष निगरानी अदालत ने 2012 के एक रिश्वत मामले में कटिहार के तत्कालीन डीसीएलआर के पेशकार वीरेंद्र कुमार सिन्हा को जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला सोमवार को विशेष निगरानी अदालत द्वारा सुनाया गया, जिसमें दोषी को कानून की कई धाराओं के तहत अलग-अलग सजा दी गई है। आर्थिक अपराध इकाई के विशेष लोक अभियोजक राम बदन चौधरी ने बताया कि दोषी को एक धारा के तहत तीन साल की सजा और छह हजार रुपये का जुर्माना दिया गया है। जुर्माना न भरने पर दोषी को दो महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। अदालत ने अन्य धाराओं के तहत भी सजा सुनाई है, जो सभी एक साथ चलेंगी।
यह मामला कटिहार जिले के मनसाही थाना क्षेत्र के डुमरिया विशनपुर निवासी मनोज कुमार सिंह द्वारा 6 जुलाई 2012 को आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज कराई गई शिकायत से शुरू हुआ था। सिंह ने बताया कि उनका एक मामला संबंधित डीसीएलआर अदालत में लंबित था। मामले की अंतिम सुनवाई 18 अगस्त 2011 को पूरी हो गई थी और आदेश के लिए मामला लंबित था। जब सिंह ने मामले के निपटारे का अनुरोध किया, तो उनसे रिश्वत मांगी गई। सिंह ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपने मामले के निपटारे की मांग की, तो डीसीएलआर ने उन्हें अपना काम करवाने के लिए अपने पेशकार को 50,000 रुपये देने का निर्देश दिया। पेशकार वीरेंद्र कुमार सिन्हा से मिलने पर, सिंह को कथित तौर पर अधिकारी के लिए 50,000 रुपये और अपने लिए अतिरिक्त 10,000 रुपये देने के लिए कहा गया। सिंह ने रिश्वत देने से मना कर दिया और बाद में मामला दर्ज कराया। जांच और न्यायिक कार्यवाही के बाद, अदालत ने पेशकार के खिलाफ आरोपों को सही पाया और उसे दोषी करार दिया।