भागलपुर में 98 लाख के गबन के आरोपी डीपीओ को मिली एक माह की बेल

भागलपुर के जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये के सरकारी राशि गबन मामले में जेल में बंद डीपीओ शशि रंजन चौधरी को निगरानी की विशेष अदालत से एक माह की प्रोविजनल बेल मिल गई है। इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
* निगरानी की विशेष अदालत ने डीपीओ को एक माह की प्रोविजनल बेल दी है।
* अदालत ने जांच अधिकारी को एक माह के भीतर केस डायरी और साक्ष्य पेश करने को कहा है।
* यह घोटाला 'तनुश्री' नाम की फर्जी शिक्षिका के नाम पर अवैध भुगतान से जुड़ा है।
* फर्जी आईडी से जुलाई तक करीब 52 लाख रुपये का भुगतान किया गया था।
* बैंक द्वारा अगस्त में संदिग्ध लेन-देन रोकने पर इस महाघोटाले का पर्दाफाश हुआ था।
अदालत का कड़ा निर्देश
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केस के जांच अधिकारी को कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अधिकारी एक माह की निर्धारित अवधि के भीतर मामले से जुड़ी केस डायरी और तमाम संबंधित साक्ष्यों को लेकर अदालत में हाजिर हों। इस जांच रिपोर्ट और सबूतों की गहन समीक्षा करने के बाद ही अदालत आरोपित की नियमित जमानत याचिका पर आगे का निर्णय लेगी।
फर्जी शिक्षिका के नाम पर हुआ था घोटाला
उल्लेखनीय है कि यह पूरा घोटाला शिक्षा विभाग में एक फर्जी शिक्षिका के नाम पर अवैध भुगतान से जुड़ा है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 'तनुश्री' नाम की एक फर्जी शिक्षिका की जाली आईडी, फर्जी पैन और नकली प्रान नंबर बनाकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये उड़ाए जा रहे थे। जुलाई तक फर्जी तरीके से करीब 52 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया था। अगस्त महीने में जब दोबारा 4,96,000 रुपये भेजने की कोशिश की गई, तो बैंक ने संदिग्ध लेन-देन भांपकर भुगतान पर रोक लगा दी, जिसके बाद इस पूरे महाघोटाले का पर्दाफाश हुआ।
घोटाले के मुख्य सूत्रधार थे डीपीओ
शुरुआत में इस मामले की एफआईआर खुद डीपीओ शशि रंजन चौधरी ने ही दर्ज कराई थी, लेकिन जब पुलिस और विशेष टीम ने जांच की परतें खोलीं, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि शिकायत दर्ज कराने वाले डीपीओ ही इस पूरे घोटाले के मुख्य सूत्रधारों में से एक थे। इसके बाद विशेष निगरानी अदालत के आदेश पर डीपीओ और उनके सहयोगी सेवामुक्त ऑपरेटर अविनाश राज को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। फिलहाल, प्रोविजनल बेल मिलने से आरोपी अधिकारी को एक महीने की अस्थायी राहत जरूर मिल गई है, लेकिन नियमित जमानत का भविष्य अब जांच अधिकारी द्वारा सौंपी जाने वाली केस डायरी पर टिका है।